vishal panwar August 17, 2020


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 17 Aug 2020 08:27 PM IST

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संकटमोचन संगीत समारोह और बजरंग बली के प्रति आस्था ही थी जो पं. जसराज को हर बार हाजिरी लगाने के लिए प्रेरित करती थी। कोरोना संक्रमण के कारण संकटमोचन संगीत समारोह का आयोजन ऑनलाइन हुआ तो अमेरिका के न्यूजर्सी से ही पं. जसराज ने ऑनलाइन गायन की प्रस्तुति दी।
 
पं. जसराज ने ऑनलाइन गायन की शुरूआत राग विहाग में युग युग चले अचल जग की गति से की। उन्होंने संकटमोचन से प्रार्थना की थी कि वो पूरे विश्व को कोरोना वायरस के प्रकोप से मुक्ति दिलाएं भजन के बीच में ही पंडित जी ने बजरंग बली को संबोधित करते हुए पूछा आप ने सुना न मेरे बाबा…।

पं.जसराज जब हनुमान लला मेरे प्यारे लला भजन गा रहे थे तो उनकी आंखें छलकने लगीं और आंसू बहने लगे। ऑनलाइन कार्यक्रम देख रहे श्रोता भी पंडिज जी को इस तरह देख भावुक हो गए। हालांकि कैमरे के पीछे मौजूद पंडित जी की पुत्री दुर्गा जसराज ने उन्हें संभाला। पंडित जसराज के इस ऑनलाइन कार्यक्रम को एक लाख 71 हजार 347 लोग लाइव सुन रहे थे। 

जब पंडित जी ने गाना शुरू किया तब तकनीकी गड़बड़ी की वजह से लिंक फेल होने के कारण प्रसारण बाधित हो गया। वीडियो तो चल रहा था लेकिन आवाज नहीं आ रही थी। ऐसे में श्रोताओं की व्याकुलता कमेंट बॉक्स में आ रहे कमेंट से साफ जाहिर हो रही थी। 

कई लोगों ने कमेंट किए प्लीज चेक ऑडियो तो कोई लिखता आवाज नहीं आ रही। इसी बीच किसी ने लिखा धैर्य का फल मीठा होता है। जल्द ही सुरीला स्वर मुखर होगा। डॉ. प्रीतेश आचार्य का  कहना है कि कौन जानता था कि संकट मोचन संगीत समारोह की यह प्रस्तुति इस आयोजन में उनकी आखिरी प्रस्तुति होगी।

सार

  • आखिरी प्रस्तुति में छलक आई थीं पं. जसराज की आंखें
  • संकटमोचन के चरणों में थी अपार श्रद्धा, नियमित आते थे हाजिरी लगाने

विस्तार

संकटमोचन संगीत समारोह और बजरंग बली के प्रति आस्था ही थी जो पं. जसराज को हर बार हाजिरी लगाने के लिए प्रेरित करती थी। कोरोना संक्रमण के कारण संकटमोचन संगीत समारोह का आयोजन ऑनलाइन हुआ तो अमेरिका के न्यूजर्सी से ही पं. जसराज ने ऑनलाइन गायन की प्रस्तुति दी।

 

पं. जसराज ने ऑनलाइन गायन की शुरूआत राग विहाग में युग युग चले अचल जग की गति से की। उन्होंने संकटमोचन से प्रार्थना की थी कि वो पूरे विश्व को कोरोना वायरस के प्रकोप से मुक्ति दिलाएं भजन के बीच में ही पंडित जी ने बजरंग बली को संबोधित करते हुए पूछा आप ने सुना न मेरे बाबा…।



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