vishal panwar August 20, 2020


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 20 Aug 2020 11:49 AM IST

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प्रदेश में खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए अब और अधिक सुविधाएं मिल सकेंगी। गांव से प्रदेश स्तर तक युवा खिलाड़ियों को चिह्नित कर खेल प्रतियोगिताओं में उनकी हिस्सेदारी बढ़ाने के साथ ही स्थानीय एवं परंपरागत खेलों को बढ़ावा दिया जाएगा। 

खेलों के प्रति प्रदेश सरकार के फोकस को देखते हुए खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने उप्र खेल प्रोत्साहन समिति नियमावली-1984 को संशोधित करने का फैसला किया है। इसके तहत तहसील, जिला, मंडल एवं राज्य स्तरीय खेल विकास एवं प्रोत्साहन समितियों का गठन किया जाएगा।

विभाग के उच्चपदस्थ सूत्र ने बताया कि नए खेलों के प्रति खिलाड़ियों की बढ़ती रुचि, प्रतिस्पर्धा और ओलंपिक के लिए उत्कृष्ट खिलाड़ियों की खोज के मद्देनजर इस नियमावली में संशोधन किया जा रहा है। गांव से लेकर शहर तक युवा वर्ग के पास खेल संबंधी पर्याप्त योग्यता है। समितियों का पुनर्गठन होने से खिलाड़ियों का सुसंगत तरीके से चयन के साथ प्रतिस्पर्धा में एकरूपता देखने को मिलेगी।  

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित नीति में खेल अवस्थापनाओं, उपकरणों, भौतिक संरचना पर विशेष बल दिया गया है। खेल संघों व संस्थाओं, विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के बीच समन्वय रखते हुए खेलों के समग्र विकास को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। अभी प्रदेश स्तर पर कोई सक्षम नियमावली न होने से न तो योजनाओं का सही क्रियान्वयन हो पा रहा है और न खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं ही मिल पा रही हैं।  

प्रदेश में खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए अब और अधिक सुविधाएं मिल सकेंगी। गांव से प्रदेश स्तर तक युवा खिलाड़ियों को चिह्नित कर खेल प्रतियोगिताओं में उनकी हिस्सेदारी बढ़ाने के साथ ही स्थानीय एवं परंपरागत खेलों को बढ़ावा दिया जाएगा। 

खेलों के प्रति प्रदेश सरकार के फोकस को देखते हुए खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने उप्र खेल प्रोत्साहन समिति नियमावली-1984 को संशोधित करने का फैसला किया है। इसके तहत तहसील, जिला, मंडल एवं राज्य स्तरीय खेल विकास एवं प्रोत्साहन समितियों का गठन किया जाएगा।

विभाग के उच्चपदस्थ सूत्र ने बताया कि नए खेलों के प्रति खिलाड़ियों की बढ़ती रुचि, प्रतिस्पर्धा और ओलंपिक के लिए उत्कृष्ट खिलाड़ियों की खोज के मद्देनजर इस नियमावली में संशोधन किया जा रहा है। गांव से लेकर शहर तक युवा वर्ग के पास खेल संबंधी पर्याप्त योग्यता है। समितियों का पुनर्गठन होने से खिलाड़ियों का सुसंगत तरीके से चयन के साथ प्रतिस्पर्धा में एकरूपता देखने को मिलेगी।  

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित नीति में खेल अवस्थापनाओं, उपकरणों, भौतिक संरचना पर विशेष बल दिया गया है। खेल संघों व संस्थाओं, विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के बीच समन्वय रखते हुए खेलों के समग्र विकास को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। अभी प्रदेश स्तर पर कोई सक्षम नियमावली न होने से न तो योजनाओं का सही क्रियान्वयन हो पा रहा है और न खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं ही मिल पा रही हैं।  



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