vishal panwar August 18, 2020


अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Tue, 18 Aug 2020 05:44 PM IST

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कोरोना मरीज के नाम पर बीआरडी मेडिकल कॉलेज और एक निजी अस्पताल ने एक मरीज को भर्ती करने से इनकार कर दिया। परिजन जब तक मरीज को दूसरे निजी अस्पताल में लेकर पहुंचते तब तक जान चली गई। परिजनों ने कॉलेज प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है।
 
जानकारी के मुताबिक बिछिया कॉलोनी के रहने वाले उपेंद्र मिश्र की मंगलवार की सुबह अचानक तबीयत खराब हो गई। परिजन आनन-फानन में इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ले गए। आरोप है कि डॉक्टरों ने कोरोना मरीज के नाम पर भर्ती करने से इनकार कर दिया।

परिजनों ने जब कोरोना संक्रमित न होने की बात कही तो डॉक्टर प्रमाण मांगने लगे। परिजनों ने काफी कोशिश की मरीज को भर्ती कर लिया जाए, लेकिन किसी ने एक न सुनी। अंत में थक हारकर मेडिकल कॉलेज रोड पर एक बड़े अस्पताल में लेकर गए। जहां पर कोरोना मरीज की बात कहकर भर्ती नहीं किया गया।

काफी देर तक मान-मनौव्वल की कोशिश भी की गई, किसी तरह भर्ती करके इलाज शुरू किया जाए। लेकिन वहां भी मरीज को भर्ती नहीं किया गया। अंत में थक हारकर परिजन तारामंडल के एक निजी अस्पताल में लेकर आए। जहां पर पहुंचते ही डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

परिजनों ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ गणेश कुमार ने बताया कि मामले की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो मामले की जांच कराई जाएगी।

सार

  • परिजन पहले बीआरडी गए फिर ले गए एक निजी अस्पताल में
  • दोनों जगहों पर मरीजों को भर्ती करने से किया गया इनकार

 

विस्तार

कोरोना मरीज के नाम पर बीआरडी मेडिकल कॉलेज और एक निजी अस्पताल ने एक मरीज को भर्ती करने से इनकार कर दिया। परिजन जब तक मरीज को दूसरे निजी अस्पताल में लेकर पहुंचते तब तक जान चली गई। परिजनों ने कॉलेज प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है।

 

जानकारी के मुताबिक बिछिया कॉलोनी के रहने वाले उपेंद्र मिश्र की मंगलवार की सुबह अचानक तबीयत खराब हो गई। परिजन आनन-फानन में इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ले गए। आरोप है कि डॉक्टरों ने कोरोना मरीज के नाम पर भर्ती करने से इनकार कर दिया।

परिजनों ने जब कोरोना संक्रमित न होने की बात कही तो डॉक्टर प्रमाण मांगने लगे। परिजनों ने काफी कोशिश की मरीज को भर्ती कर लिया जाए, लेकिन किसी ने एक न सुनी। अंत में थक हारकर मेडिकल कॉलेज रोड पर एक बड़े अस्पताल में लेकर गए। जहां पर कोरोना मरीज की बात कहकर भर्ती नहीं किया गया।


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मामले की होगी जांच



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