vishal panwar August 16, 2020


ऑनलाइन हुआ कवि सम्मेलन
– फोटो : अमर उजाला

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अमर उजाला के अभिनव अभियान ‘मां तुझे प्रणाम’ कि तहत 74 वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को ऑनलाइन कवि सम्मेलन ‘जरा याद करो कुर्बानी’ का आयोजन किया गया। अमर उजाला काव्य कैफे की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शब्द शिल्पियों ने क्रांतिवीरों की शहादत का मार्मिक चित्रांकन किया। 

हास्य के हस्ताक्षर प्रो. अशोक चक्रधर एवं ओज के कवि डॉ. हरिओम पंवार ने काव्य पाठ किया। हरिओम पंवार ने कविता पढ़ी, ‘जो सीने पर गोली खाने को आगे बढ़ जाते थे, भारत माता की जय कहकर फांसी पर चढ़ जाते थे।’

अमर उजाला काव्य कैफे की परंपरा का निर्वहन करते हुए तीन युवा कवि राहुल शर्मा, प्रवीण कुमार पांडेय प्रज्ञार्थ एवं डॉ. राहुल अवस्थी ने कविता पढ़ी। अमर उजाला के सभी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कवि सम्मेलन का सजीव प्रसारण हुआ। जिसमें श्रोताओं ने ऑनलाइन संदेशों के माध्यम से सराहना की। आगरा में भी बड़ी संख्या में लोगों ने कविताओं को सराहा।

कवि सम्मेलन के सूत्रधार की जिम्मेदारी संभालते हुए प्रो. अशोक चक्रधर ने हिंदी काव्य साहित्य की महानतम विभूतियों को नमन किया। चंद संस्मरणों को साझा करते हुए उन्होंने सम्मेलन का आगाज किया। वहीं, क्रमवार कवियों को काव्यपाठ के लिए आमंत्रित किया। 

डॉ. हरिओम पंवार ने कहा कि आज के दिन हम देश की आजादी के लिए जिन्होंने प्राण न्यौछावर किए उनको याद किए बिना जश्न नहीं मना सकते। कोरोना वारियर्स ने भी व्रत लेकर इसमें बड़ा योगदान दिया है। उन्होंने यह कविता पढ़ी-

‘जो सीने पर गोली खाने को आगे बढ़ जाते थे
भारत माता की जय कहकर फांसी पर चढ़ जाते थे
जिन बेटों ने आजादी के लिए जवानी दे डाली
आजादी के हवन कुंड के लिए कहानी दे डाली
दूर गगन के तारे उनके नाम दिखाई देते हैं
उनके स्मारक भी चारों धाम दिखाई देते हैं।
वे देवों की लोकसभा के अंग बने बैठे होंगे।
वे सतरंगी इंद्रधनुष के रंग बने बैठे होंगे, 
उन बेटों की याद भुलाने की नादानी मत करना 
इंद्रधनुष के रंग चुराने की नादानी मत करना।’

युवा कवि डॉ. राहुल अवस्थी ने देशभक्ति से ओतप्रोत कविता सुनाकर सभी को जोश से भर दिया। उन्होंने सुनाया… मां को है प्रणाम, है प्रणाम मां की माटी को, माटी पे लिखित तदबीरों को प्रणाम है, देश की स्वतंत्रता के शानदार पृष्ठों पर, एक खींची हुई काल की लकीरों को प्रणाम है।

कवि प्रवीण कुमार पांडेय प्रज्ञार्थ ने माटी वंदन गीत सुनाया…मैं तुझे हिंदुस्तान कहूं या कि अपनी पहचान कहूं। कवि राहुल शर्मा अक्षत ने कहा… संविधान की करें जो मर्यादा छिन्न भिन्न, उन्हें अपना ही संविधान कैसे सौंप दें, इंच-इंच बेच खाई देश की जिन्होंने, कहो उन्हें ये वसुंधरा महान कैसे सौंप दें। सत्ता हेतु चोर गठबंधन बना ही लेते, उन्हें इस देश की कमान कैसे सौंप दें। जिनकी रगों में खून है देशद्रोहियों का उन्हें ये समूचा हिंदुस्तान कैसे सौंप दें। 

क्रांतिकारी शहीदे आजम भगत सिंह और दूसरे क्रांतिकारियों पर पंक्ति पढ़कर उन्होंने हर किसी को भाव विभोर कर दिया… बात सुनाऊं मैं तुमको आजादी के मतवालों की, देख हौसले जिनके छाती फट जाती थी कालों की।

सार

  • अमर उजाला मां तुझे प्रणाम के तहत कवि सम्मेलन ‘जरा याद करो कुर्बानी’ का आयोजन

विस्तार

अमर उजाला के अभिनव अभियान ‘मां तुझे प्रणाम’ कि तहत 74 वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को ऑनलाइन कवि सम्मेलन ‘जरा याद करो कुर्बानी’ का आयोजन किया गया। अमर उजाला काव्य कैफे की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शब्द शिल्पियों ने क्रांतिवीरों की शहादत का मार्मिक चित्रांकन किया। 

हास्य के हस्ताक्षर प्रो. अशोक चक्रधर एवं ओज के कवि डॉ. हरिओम पंवार ने काव्य पाठ किया। हरिओम पंवार ने कविता पढ़ी, ‘जो सीने पर गोली खाने को आगे बढ़ जाते थे, भारत माता की जय कहकर फांसी पर चढ़ जाते थे।’

अमर उजाला काव्य कैफे की परंपरा का निर्वहन करते हुए तीन युवा कवि राहुल शर्मा, प्रवीण कुमार पांडेय प्रज्ञार्थ एवं डॉ. राहुल अवस्थी ने कविता पढ़ी। अमर उजाला के सभी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कवि सम्मेलन का सजीव प्रसारण हुआ। जिसमें श्रोताओं ने ऑनलाइन संदेशों के माध्यम से सराहना की। आगरा में भी बड़ी संख्या में लोगों ने कविताओं को सराहा।



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