vishal panwar August 18, 2020


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राज कपूर पर फिल्माए गए मुकेश के गीत मेरा जूता है जापानी… को तो आपने जरूर सुना होगा। अब जापानी जूते को टक्कर देने के लिए कनपुरिया जूता भी तैयार है। दरअसल, कानपुर के चर्म उत्पाद जापान के बाजार में उतारने की तैयारी हो रही है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि एक सामान्य जापानी, भारतीयों की तुलना में साल भर में चार गुना अधिक जूते पहनता है।

जापानियों के इसी शौक को भुनाने के लिए तैयारी हो रही है। चर्म उत्पादों को जापानी बाजार में उतारने के लिए सोमवार को तीन दिवसीय वर्चुअल क्रेता विक्रेता सम्मेलन की शुरुआत हुई। इसमें कानपुर की चार और देश भर की 26 कंपनियों ने हिस्सा लिया। हालांकि इसमें कच्चा चमड़ा, तैयार चमड़ा, चमड़े के वस्त्र व चमड़े के अन्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियां भी शामिल हुईं, लेकिन फोकस फुटवियर इंडस्ट्री पर अधिक रहा।

कोरोना संक्रमण की वजह से बीते छह माह से चमड़े का निर्यात प्रभावित है। इससे पहले प्रदूषण और अन्य समस्याओं की वजह से चमड़ा उद्योग बुरे दौर से गुजरा। इस कारण कई खरीदार देशों ने स्थानीय कंपनियों से दूरी बना ली है। चूंकि कोरोना संक्रमण का दौर अभी लंबे समय तक चल सकता है। इस वजह से चर्म निर्यात परिषद ऑनलाइन प्रदर्शनियों के जरिये अपने उत्पादों को दुनिया के अलग अलग देशों के सामने पेश कर नए बाजार की तलाश कर रहा है।

 
चर्म निर्यात परिषद का पूरा ध्यान इस बार ऐसे देशों की ओर है जहां चमड़े के जूतों की खपत तो है लेकिन वहां कानपुर या अन्य भारतीय कंपनियों का वर्चस्व नहीं है। जापान ऐसा ही देश है। यहां जूतों की खपत अन्य देशों की तुलना में काफी अधिक है। यहां महंगे फैशनेबल जूते पहनने का चलन है।

कानपुर की हिस्सेदारी कम
फुटवियर निर्यात मामलों के जानकार जफर फिरोज बताते हैं कि जापान में जूतों की जितनी अधिक मांग है, कानपुर की हिस्सेदारी उतनी ही कम है। वर्ष 2019-20 के आंकड़ों पर गौर करें तो वहां कुल मांग का महज सवा फीसदी फुटवियर ही कानपुर की कंपनियों ने उपलब्ध कराए। यानी जापान के बाजार में पैठ बनाने के लिए बहुत संभावनाएं हैं। खास बात ये है कि जापानी चीन के चमड़ा उत्पाद पसंद नहीं करते।

जापानी बाजार में पैठ बनाना मकसद
चर्म निर्यात परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष जावेद इकबाल बताते हैं इस वर्ष जापान के फुटवियर बाजार में पैठ बनाने की रणनीति तैयार की गई है। उत्पाद वहां की जरूरत के हिसाब से बनाए गए हैं। इसमें वहां के डिजाइनरों की मदद ली गई है। अगले एक वर्ष में चार ऑनलाइन प्रदर्शनियों के आयोजन का लक्ष्य रखा गया है। इस प्रदर्शनी में कानपुर की ग्रो मोर इंटरनेशनल, लेदर हब, आईके इंटरनेशनल, नाज एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां हिस्सा ले रही हैं।

राज कपूर पर फिल्माए गए मुकेश के गीत मेरा जूता है जापानी… को तो आपने जरूर सुना होगा। अब जापानी जूते को टक्कर देने के लिए कनपुरिया जूता भी तैयार है। दरअसल, कानपुर के चर्म उत्पाद जापान के बाजार में उतारने की तैयारी हो रही है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि एक सामान्य जापानी, भारतीयों की तुलना में साल भर में चार गुना अधिक जूते पहनता है।

जापानियों के इसी शौक को भुनाने के लिए तैयारी हो रही है। चर्म उत्पादों को जापानी बाजार में उतारने के लिए सोमवार को तीन दिवसीय वर्चुअल क्रेता विक्रेता सम्मेलन की शुरुआत हुई। इसमें कानपुर की चार और देश भर की 26 कंपनियों ने हिस्सा लिया। हालांकि इसमें कच्चा चमड़ा, तैयार चमड़ा, चमड़े के वस्त्र व चमड़े के अन्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियां भी शामिल हुईं, लेकिन फोकस फुटवियर इंडस्ट्री पर अधिक रहा।

कोरोना संक्रमण की वजह से बीते छह माह से चमड़े का निर्यात प्रभावित है। इससे पहले प्रदूषण और अन्य समस्याओं की वजह से चमड़ा उद्योग बुरे दौर से गुजरा। इस कारण कई खरीदार देशों ने स्थानीय कंपनियों से दूरी बना ली है। चूंकि कोरोना संक्रमण का दौर अभी लंबे समय तक चल सकता है। इस वजह से चर्म निर्यात परिषद ऑनलाइन प्रदर्शनियों के जरिये अपने उत्पादों को दुनिया के अलग अलग देशों के सामने पेश कर नए बाजार की तलाश कर रहा है।

 



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