vishal panwar August 15, 2020


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
Updated Sat, 15 Aug 2020 12:03 AM IST

सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : अमर उजाला

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देश को आजादी मिलने के बाद 15 अगस्त 1947 की सुबह उत्साह और उमंग के साथ हुई। चारों ओर जश्न का माहौल था। मैनपुरी जिले में आजादी के मतवालों ने घरों और दुकानों पर तिरंगा फहराया। शाम को घर-घर दीये जलाए गए। जिले के वयोवृद्ध लोगों के दिल और दिमाग में आज भी आजाद भारत की पहली सुबह का दृश्य है। 

आजादी का जिक्र करते ही वो आज भी रोमांचित हो जाते हैं। लेकिन आजादी के बाद बदले देश के माहौल से बुजुर्ग निराश हैं। उनका कहना है कि समय के साथ स्वतंत्रता दिवस का उत्साह कम होता जा रहा है। आजादी के दीवानों ने जो सपना देखा था वो पूरा नहीं हो पा रहा है। विशेष अवसरों पर ही आजादी के दीवानों को याद किया जाता है।  

संता-बसंता चौराहे पर मनाया था जश्न

देश को आजादी मिलने के बाद पहले स्वतंत्रता दिवस पर आजादी के दीवानों ने नगर के संता-बसंता चौराहे पर जश्न मनाया था।  लोगों ने तिरंगा झंडा फहराकर आजादी के दीवानों को सम्मानित किया था। शहर में पूरे दिन जगह-जगह पहले स्वतंत्रता दिवस पर कार्यक्रम भी आयोजित किए गए थे। शाम को घर-घर दीपक जलाए गए। 

मोहल्ला मिश्राना के श्रीकृष्ण उर्फ लल्ला चौबे ने बताया कि 15 अगस्त 1947 को जिलेभर में जश्न का माहौल था। लोगों ने अपने घरों और दुकानों पर दीपक जलाकर जश्न मनाया था। चौराहों पर एकत्रित होकर देशप्रेम के नारे लगाए थे। अपनी दुकानों और मकानों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराकर खुशी जताई थी। चारों और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत नारे लग रहे थे। 

टीकाराम चतुर्वेदी ने कहा कि आजादी के आंदोलन के दौरान देश में जो माहौल बना था, वो देश के आजाद होने पर चौगुना हो गया था। शहर का संता-बसंता चौराहा आज भी खुशी के माहौल का गवाह है। चौराहे के आसपास के मकान और दुकानों की सजावट करके लोगों ने जश्न मनाया था। जिलेभर में प्रभातफेरी निकाली गई थी। आजादी का यह जश्न पूरी साल चला था।  

औंछा निवासी कृष्ण गोपाल गुप्ता ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस का अब पहले जैसा माहौल नहीं है। लोगों की सोच में बदलाव आ गया है। युवा पीढ़ी आजादी का इतिहास भूल चुकी है। जिले में पहला स्वतंत्रता दिवस कैसे मनाया गया। इसकी युवा पीढ़ी को जानकारी ही नहीं है। अब स्वतंत्रता दिवस पर रस्म अदायगी होती है।

सार

  • उत्साह और उमंग लेकर आई थी आजाद भारत की पहली सुबह 

विस्तार

देश को आजादी मिलने के बाद 15 अगस्त 1947 की सुबह उत्साह और उमंग के साथ हुई। चारों ओर जश्न का माहौल था। मैनपुरी जिले में आजादी के मतवालों ने घरों और दुकानों पर तिरंगा फहराया। शाम को घर-घर दीये जलाए गए। जिले के वयोवृद्ध लोगों के दिल और दिमाग में आज भी आजाद भारत की पहली सुबह का दृश्य है। 

आजादी का जिक्र करते ही वो आज भी रोमांचित हो जाते हैं। लेकिन आजादी के बाद बदले देश के माहौल से बुजुर्ग निराश हैं। उनका कहना है कि समय के साथ स्वतंत्रता दिवस का उत्साह कम होता जा रहा है। आजादी के दीवानों ने जो सपना देखा था वो पूरा नहीं हो पा रहा है। विशेष अवसरों पर ही आजादी के दीवानों को याद किया जाता है।  

संता-बसंता चौराहे पर मनाया था जश्न

देश को आजादी मिलने के बाद पहले स्वतंत्रता दिवस पर आजादी के दीवानों ने नगर के संता-बसंता चौराहे पर जश्न मनाया था।  लोगों ने तिरंगा झंडा फहराकर आजादी के दीवानों को सम्मानित किया था। शहर में पूरे दिन जगह-जगह पहले स्वतंत्रता दिवस पर कार्यक्रम भी आयोजित किए गए थे। शाम को घर-घर दीपक जलाए गए। 


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जिलेभर में था जश्न का माहौल



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