vishal panwar August 18, 2020


इलाहाबाद हाईकोर्ट
– फोटो : अमर उजाला

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कोरोना संक्रमण के उच्चतम स्तर की ओर बढ़ने के बावजूद इसकी रोकथाम के उपायों को जमीन पर लाने में नाकामी को देखते हुए हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट का कहना है कि लगभग पांच माह बीत जाने के बाद भी सरकार अभी समस्या से निपटने का रोडमैप तैयार नहीं कर सकी है।

इसके प्रयास सिर्फ कागजों पर ही दिखाई दे रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि इससे जाहिर है कि रोडमैप और गाइडलाइन जारी करना पर्याप्त नहीं है। जमीनी स्तर पर काम दिखाई पड़ना चाहिए। हाईकोर्ट ने संक्रमण की रोकथाम के लिए सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क पहनने की अनिवार्यता के नियम का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया था। 

इन निर्देशों का पालन नहीं होने पर अधिवक्ता श्रीराम कौशिक और प्रियंका ने अवमानना याचिका दाखिल की है। याचिका के साथ कई फोटोग्राफ भी संलग्न किए गए हैं, जिनमें सोशल डिस्टेंसिग और मास्क पहनने के नियमों की धज्जियां उड़ती साफ दिख रही हैं। कोर्ट ने इन तस्वीरों को देखने के बाद कहा है कि जाहिर है कि सरकार की योजनाएं सिर्फ कागजों पर ही हैं।

कोर्ट ने प्रयागराज के डीएम और एसएसपी से स्पष्टीकरण तलब कर लिया है। दोनों अधिकारियों को मंगलवार सुबह दस बजे वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालत के समक्ष उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। उनसे लिखित जवाब भी तलब किया है। इसके अलावा अधिवक्ता अपूर्व देव ने एप्लीकेशन दायर कर कहा है कि मास्क पहनना अनिवार्य किया जाए, इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

ऑड इवन की तर्ज पर खोलेंगे बाजार

 हाईकोर्ट द्वारा पांच अगस्त को जारी आदेश के अनुपालन में अपर महाधिवक्ता ने मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अजीत कुमार की पीठ को बताया कि सरकार ने कार्ययोजना तैयार कर ली है और इसका कड़ाई से पालन करते हुए 15 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। इसके मुताबिक बाजारों में भीड़ भाड़ कम करने के लिए इसे ऑड-इवन की तर्ज पर खोला जाएगा। भीड़भाड़ वाले इलाकों की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। स्थिति के अनुसार बैरियर और चेकपोस्ट लगाए जाएंगे। पुलिस की गश्त गलियों, कस्बों और गांवों तक बढ़ाई जाएगी। 

सात जिलों में सघन निगरानी

अपर महाधिवक्ता ने बताया कि कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित सात जिलों लखनऊ, प्रयागराज, बरेली, झांसी, कानपुर नगर, बलिया, वाराणसी और गोरखपुर की राज्य सरकार सघनता से निगरानी कर रही है और इसके परिणाम से जल्दी ही अदालत को अवगत कराया जाएगा। उन्होंने नियमों को तोड़ने वालों पर की गई कार्रवाई का डाटा भी कोर्ट में प्रस्तुत किया। 

वकील ने किया महबूब बट और भूरे लाल का जिक्र

हाईकोर्ट के 75 वर्षीय अधिवक्ता एसके गर्ग कोरोना पर कोर्ट को जानकारी देने स्वयं अदालत में उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि इस जिले में महबूब बट और भूरे लाल जैसे अफसर रहे हैं, जो स्वयं मौके पर जाकर यह योजना के क्रियान्वयन की निगरानी करते थे। आज कोई अधिकारी मौके पर नहीं जाता है। 

हर जिले की जानकारी तलब

हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी जिलों के जिम्मेदार अधिकारियों को हलफनामा दाखिल कर अपने जिले की स्थिति से अवगत कराने का निर्देश दिया है। एडिशनल सॉलीसिटर जनरल एसपी सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने उच्च क्षमता की कोविड जांच मशीन उपलब्ध कराई है मगर जिले में अभी तक उसे लगाने के लिए स्थान उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। मशीन लगने से जांच की क्षमता में गुणात्मक वृद्धि होगी। 

दो पहिया की सवारी का आदेश संशोधित

हाईकोर्ट ने दो पहिया पर सवारी को लेकर पांच अगस्त के अपने आदेश में संशोधन कर दिया है। कोर्ट को बताया गया इससे आम लोगों को काफी असुविधा हो रही है। इस पर कोर्ट ने दो पहिया वाहन पर दो लोगों को सवारी की अनुमति दे दी है। इससे पूर्व कोर्ट ने कहा था कि सिर्फ पति-पत्नी के अलावा दो पहिया वाहन पर एक ही व्यक्ति ही चलेगा। मामले की सुनवाई मंगलवार को भी होगी।

कोरोना संक्रमण के उच्चतम स्तर की ओर बढ़ने के बावजूद इसकी रोकथाम के उपायों को जमीन पर लाने में नाकामी को देखते हुए हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट का कहना है कि लगभग पांच माह बीत जाने के बाद भी सरकार अभी समस्या से निपटने का रोडमैप तैयार नहीं कर सकी है।

इसके प्रयास सिर्फ कागजों पर ही दिखाई दे रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि इससे जाहिर है कि रोडमैप और गाइडलाइन जारी करना पर्याप्त नहीं है। जमीनी स्तर पर काम दिखाई पड़ना चाहिए। हाईकोर्ट ने संक्रमण की रोकथाम के लिए सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क पहनने की अनिवार्यता के नियम का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया था। 

इन निर्देशों का पालन नहीं होने पर अधिवक्ता श्रीराम कौशिक और प्रियंका ने अवमानना याचिका दाखिल की है। याचिका के साथ कई फोटोग्राफ भी संलग्न किए गए हैं, जिनमें सोशल डिस्टेंसिग और मास्क पहनने के नियमों की धज्जियां उड़ती साफ दिख रही हैं। कोर्ट ने इन तस्वीरों को देखने के बाद कहा है कि जाहिर है कि सरकार की योजनाएं सिर्फ कागजों पर ही हैं।

कोर्ट ने प्रयागराज के डीएम और एसएसपी से स्पष्टीकरण तलब कर लिया है। दोनों अधिकारियों को मंगलवार सुबह दस बजे वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालत के समक्ष उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। उनसे लिखित जवाब भी तलब किया है। इसके अलावा अधिवक्ता अपूर्व देव ने एप्लीकेशन दायर कर कहा है कि मास्क पहनना अनिवार्य किया जाए, इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

ऑड इवन की तर्ज पर खोलेंगे बाजार

 हाईकोर्ट द्वारा पांच अगस्त को जारी आदेश के अनुपालन में अपर महाधिवक्ता ने मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अजीत कुमार की पीठ को बताया कि सरकार ने कार्ययोजना तैयार कर ली है और इसका कड़ाई से पालन करते हुए 15 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। इसके मुताबिक बाजारों में भीड़ भाड़ कम करने के लिए इसे ऑड-इवन की तर्ज पर खोला जाएगा। भीड़भाड़ वाले इलाकों की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। स्थिति के अनुसार बैरियर और चेकपोस्ट लगाए जाएंगे। पुलिस की गश्त गलियों, कस्बों और गांवों तक बढ़ाई जाएगी। 

सात जिलों में सघन निगरानी

अपर महाधिवक्ता ने बताया कि कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित सात जिलों लखनऊ, प्रयागराज, बरेली, झांसी, कानपुर नगर, बलिया, वाराणसी और गोरखपुर की राज्य सरकार सघनता से निगरानी कर रही है और इसके परिणाम से जल्दी ही अदालत को अवगत कराया जाएगा। उन्होंने नियमों को तोड़ने वालों पर की गई कार्रवाई का डाटा भी कोर्ट में प्रस्तुत किया। 

वकील ने किया महबूब बट और भूरे लाल का जिक्र

हाईकोर्ट के 75 वर्षीय अधिवक्ता एसके गर्ग कोरोना पर कोर्ट को जानकारी देने स्वयं अदालत में उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि इस जिले में महबूब बट और भूरे लाल जैसे अफसर रहे हैं, जो स्वयं मौके पर जाकर यह योजना के क्रियान्वयन की निगरानी करते थे। आज कोई अधिकारी मौके पर नहीं जाता है। 

हर जिले की जानकारी तलब

हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी जिलों के जिम्मेदार अधिकारियों को हलफनामा दाखिल कर अपने जिले की स्थिति से अवगत कराने का निर्देश दिया है। एडिशनल सॉलीसिटर जनरल एसपी सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने उच्च क्षमता की कोविड जांच मशीन उपलब्ध कराई है मगर जिले में अभी तक उसे लगाने के लिए स्थान उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। मशीन लगने से जांच की क्षमता में गुणात्मक वृद्धि होगी। 

दो पहिया की सवारी का आदेश संशोधित

हाईकोर्ट ने दो पहिया पर सवारी को लेकर पांच अगस्त के अपने आदेश में संशोधन कर दिया है। कोर्ट को बताया गया इससे आम लोगों को काफी असुविधा हो रही है। इस पर कोर्ट ने दो पहिया वाहन पर दो लोगों को सवारी की अनुमति दे दी है। इससे पूर्व कोर्ट ने कहा था कि सिर्फ पति-पत्नी के अलावा दो पहिया वाहन पर एक ही व्यक्ति ही चलेगा। मामले की सुनवाई मंगलवार को भी होगी।



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