vishal panwar August 20, 2020


कोरोना से मौत के बाद अंतिम संस्कार करते सरकारी कर्मचारी
– फोटो : PTI

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कानपुर में कोरोना संक्रमितों की मृत्यु दर अगस्त महीने में भी प्रदेश में टॉप पर है। लखनऊ से दोगुने से अधिक मौतें कानपुर में हो रही हैं। इसकी मुख्य वजह रोगियों की कोमॉर्बिडिटी है। इसका मतलब डायबिटीज, हाइपरटेंशन, दमा, अस्थमा, गुर्दा, हारमोंस व लिवर आदि के रोगियों को संक्रमण होते ही निमोनिया हो जा रहा है।

ऐसे लोग लेवल थ्री में पहुंच जा रहे हैं। जिससे मृत्यु दर बढ़ती जा रही। अगस्त में संक्रमितों की मौत की प्रतिदिन औसत संख्या जुलाई से लगभग दोगुनी है। लखनऊ में संक्रमित अधिक और मृत्यु दर कम है। लेकिन कानपुर में संक्रमितों की संख्या कम होने के बाद भी मृत्यु दर नियंत्रित नहीं हो पा रही।

इसकी बड़ी वजह रोगियों की रियल टाइम भर्ती न होना बताया जा रहा है। लखनऊ में मंगलवार तक 18 हजार संक्रमितों में 228 मौतें हुई हैं। जबकि कानपुर में 11 हजार 219 संक्रमितों में मौत का आंकड़ा 334 है। इस तरह लखनऊ में मृत्यु दर 1.2 प्रतिशत और नगर में 2.97 प्रतिशत है। 

 
शासन से आई टीमों ने मृत्यु दर का अध्ययन करने पर पाया कि संक्रमित मरीज समय से भर्ती नहीं हो पा रहे हैं। डेथ ऑडिट में उजागर हुआ कि रोगी अति गंभीर हालत में हैलट पहुंचते हैं। और उन्हें इलाज मिलने में देर हो जाती है। इसके अलावा संसाधन का भी अभाव रहता है। पुराने रोगियों के बचाव के लिए बनी किसी भी रणनीति पर अमल नहीं हो रहा है।

मंडलायुक्त की बैठकों में भी पुराने रोगियों को चिह्नित करने के लिए लगातार निर्देश दिए जाते हैं। जुलाई में प्रतिदिन करीब पांच रोगियों के मरने का औसत था जो अगस्त में लगभग आठ हो गया है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरबी कमल का कहना है कि अगर समय से रोगी आ जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है। 

संक्रमितों की बढ़ा रहेे मॉनीटरिंग
अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य डॉ. आरपी यादव का कहना है कि होम आइसोलेशन में रहने वाले संक्रमितों और लेवल वन एवं टू अस्पतालों में भर्ती मरीजों की मॉनीटरिंग बढ़ाई जा रही है। रोगी की स्थिति बिगड़ते ही उसे तुरंत रेफर करने तथा समय से उपचार देने पर जोर है। अधिक तबीयत बिगड़ने पर रेफर करने से मृत्य दर बढ़ती है।

कानपुर में कोरोना संक्रमितों की मृत्यु दर अगस्त महीने में भी प्रदेश में टॉप पर है। लखनऊ से दोगुने से अधिक मौतें कानपुर में हो रही हैं। इसकी मुख्य वजह रोगियों की कोमॉर्बिडिटी है। इसका मतलब डायबिटीज, हाइपरटेंशन, दमा, अस्थमा, गुर्दा, हारमोंस व लिवर आदि के रोगियों को संक्रमण होते ही निमोनिया हो जा रहा है।

ऐसे लोग लेवल थ्री में पहुंच जा रहे हैं। जिससे मृत्यु दर बढ़ती जा रही। अगस्त में संक्रमितों की मौत की प्रतिदिन औसत संख्या जुलाई से लगभग दोगुनी है। लखनऊ में संक्रमित अधिक और मृत्यु दर कम है। लेकिन कानपुर में संक्रमितों की संख्या कम होने के बाद भी मृत्यु दर नियंत्रित नहीं हो पा रही।

इसकी बड़ी वजह रोगियों की रियल टाइम भर्ती न होना बताया जा रहा है। लखनऊ में मंगलवार तक 18 हजार संक्रमितों में 228 मौतें हुई हैं। जबकि कानपुर में 11 हजार 219 संक्रमितों में मौत का आंकड़ा 334 है। इस तरह लखनऊ में मृत्यु दर 1.2 प्रतिशत और नगर में 2.97 प्रतिशत है। 

 



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