vishal panwar August 19, 2020


डॉ कफील खान (फाइल)
– फोटो : अमर उजाला

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रासुका के तहत बंदी डॉ. कफील खान की रासुका को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट में 24 अगस्त को सुनवाई होगी। कफील खान के अधिवक्ता द्वारा जवाब दाखिल करने के लिए  समय मांगे जाने को मंजूर करते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि अवकाश में भी याची के अधिवक्ता हलफनामा दाखिल करते हैं तो उसे स्वीकार कर लिया जाए।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर तथा न्यायमूर्ति समित गोपाल की खंडपीठ ने डॉ. कफील अहमद खान की मां नुजहत परवीन की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया है। सीएए को लेकर भड़काऊ बयानबाजी करने के लिए जिलाधिकारी अलीगढ़ ने 13 फरवरी 2020 को कफील खान को रासुका में निरुद्ध करने  का आदेश दिया है। 

यह अवधि दो बार बढ़ाई जा चुकी है। याचिका में निरुद्धि की वैधता को चुनौती दी गई है। हालांकि कफील खान को गोरखपुर के गुलहरिया थाने में दर्ज एक मुकदमे में 29 जनवरी 2020 को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका  था। जेल में रहते हुए रासुका तामील कराया गया है।

याची ने डॉ. खान की रासुका को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीमकोर्ट ने हाईकोर्ट को मूल पत्रावली भेजते हुए तय करने का आदेश दिया है। हालांकि डाक सेवा की उपलब्धता न होने के कारण मूल पत्रावली अभी तक नहीं मिल सकी है। आठ मई 20 को निबंधक सिविल को ई-मेल प्राप्त हुआ था जिसपर याचिका कोर्ट में पेश की गई। 
कोर्ट ने अन्य पक्षकार बनाने की अनुमति देते हुए याचिका 10 जून को रखी। इस दिन याची अधिवक्ता ने समय मांगा और अगली सुनवाई की 16 जून तिथि नियत हुई। सीनियर वकील द्वारा बहस करने, कभी याचिका में संशोधन अर्जी के लिए याची ने कई बार समय मांगा। 

याचिका जब 27 जुलाई को पेश हुई तो संशोधित याचिका दाखिल करने के लिए याची ने फिर एक सप्ताह का समय मांगा। 5 अगस्त को दाखिल संशोधित याचिका पर सरकार से कोर्ट ने जवाब मांगा था। इसी बीच याची याचिका शीघ्र तय करने का निर्देश जारी करने की मांग में सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। 

किंतु यह कहते हुए 14 अगस्त को अर्जी वापस ले ली कि हाईकोर्ट में दाखिल करेंगे। बुधवार को सुनवाई के समय याची अधिवक्ता ने प्रत्युत्तर हलफ़नामा दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिस पर कोर्ट ने याचिका निस्तारित करने की तिथि 24 अगस्त नियत की है।

रासुका के तहत बंदी डॉ. कफील खान की रासुका को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट में 24 अगस्त को सुनवाई होगी। कफील खान के अधिवक्ता द्वारा जवाब दाखिल करने के लिए  समय मांगे जाने को मंजूर करते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि अवकाश में भी याची के अधिवक्ता हलफनामा दाखिल करते हैं तो उसे स्वीकार कर लिया जाए।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर तथा न्यायमूर्ति समित गोपाल की खंडपीठ ने डॉ. कफील अहमद खान की मां नुजहत परवीन की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया है। सीएए को लेकर भड़काऊ बयानबाजी करने के लिए जिलाधिकारी अलीगढ़ ने 13 फरवरी 2020 को कफील खान को रासुका में निरुद्ध करने  का आदेश दिया है। 

यह अवधि दो बार बढ़ाई जा चुकी है। याचिका में निरुद्धि की वैधता को चुनौती दी गई है। हालांकि कफील खान को गोरखपुर के गुलहरिया थाने में दर्ज एक मुकदमे में 29 जनवरी 2020 को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका  था। जेल में रहते हुए रासुका तामील कराया गया है।

याची ने डॉ. खान की रासुका को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीमकोर्ट ने हाईकोर्ट को मूल पत्रावली भेजते हुए तय करने का आदेश दिया है। हालांकि डाक सेवा की उपलब्धता न होने के कारण मूल पत्रावली अभी तक नहीं मिल सकी है। आठ मई 20 को निबंधक सिविल को ई-मेल प्राप्त हुआ था जिसपर याचिका कोर्ट में पेश की गई। 



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