vishal panwar August 20, 2020


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उत्तर प्रदेश के 40 आईटीआई के साथ 15 राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों को भी निजी हाथों में सौंपा जाएगा। हालांकि इससे छात्रों को अधिक फीस भरनी पड़ेगी। अभी राजकीय आईटीआई में छात्रों को 480 रुपये सालाना फीस देनी होती है। जबकि पीपीपी मॉडल वाले संस्थानों की फीस 26 हजार तक हो सकती है।

इन संस्थानों में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित किया जाना है। पहले चरण में 16 आईटीआई और 15 पॉलिटेक्निक को निजी हाथों में सौंपा जाएगा। दूसरे चरण में 24 आईटीआई का निजीकरण होगा। बुधवार को निदेशक प्रशिक्षण एवं सेवायोजन कुणाल सिल्कू की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस मामले पर चर्चा हुई थी।

गले सत्र से पीपीपी मॉडल के तहत 70 प्रतिशत आईटीआई छात्र को ज्यादा फीस देनी होगी और 30 प्रतिशत छात्र राजकीय आईटीआई की फीस देंगे। वहीं पॉलिटेक्निक छात्रों को प्राइवेट पॉलिटेक्निक जितनी फीस देनी होगी। साथ ही पीपीई मॉडल के तहत संस्थान चलाने वाली कंपनी ही शिक्षकों की भर्ती करेगी। बैठक में कई अधिकारी मौजूद रहे पर बयान देने से सभी बचते नजर आए।

 
कर्मचारी संगठन ने किया विरोध
उत्तर प्रदेश प्रशिक्षण एवं सेवायोजन सेवा संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष अजय द्विवेदी ने आईटीआई संस्थानों क ो निजी हाथों में सौंपने का विरोध जताया है। उनका कहना है संस्थानों की फीस बढ़ाने से तकनीकी शिक्षा आम जन से दूर हो जाएगी। सरकार का यह फैसला जनता और कर्मचारी विरोधी है।

इनका निजीकरण पहले 

राजकीय आईटीआई – राजातालाब वाराणसी, पटियाली कासगंज, इकौना श्रावस्ती, महिला कसया कुशीनगर, पैलानी बांदा, लालगंज प्रतापगढ़, रानीगंज प्रतापगढ़, कांठ मुरादाबाद, लोनी गाजियाबाद, जयसिंहपुर सुल्तानपुर, ताखा इटावा, पाली ललितपुर, बांसडीह बलिया, भटहट गोरखपुर, जंगल कौड़िया गोरखपुर और सोरांव प्रयागराज ।

राजकीय पॉलिटेक्निक – आजमगढ़, बलिया, मिर्जापुर, बरेली, बहराइच, शाहजहांपुर, बाराबंकी, गोरखपुर, महर्षि पतंजलि गोंडा, हरदोई, कन्नौज, महोबा, बिजनौर, मेरठ और सहारनपुर।

उत्तर प्रदेश के 40 आईटीआई के साथ 15 राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों को भी निजी हाथों में सौंपा जाएगा। हालांकि इससे छात्रों को अधिक फीस भरनी पड़ेगी। अभी राजकीय आईटीआई में छात्रों को 480 रुपये सालाना फीस देनी होती है। जबकि पीपीपी मॉडल वाले संस्थानों की फीस 26 हजार तक हो सकती है।

इन संस्थानों में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित किया जाना है। पहले चरण में 16 आईटीआई और 15 पॉलिटेक्निक को निजी हाथों में सौंपा जाएगा। दूसरे चरण में 24 आईटीआई का निजीकरण होगा। बुधवार को निदेशक प्रशिक्षण एवं सेवायोजन कुणाल सिल्कू की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस मामले पर चर्चा हुई थी।

गले सत्र से पीपीपी मॉडल के तहत 70 प्रतिशत आईटीआई छात्र को ज्यादा फीस देनी होगी और 30 प्रतिशत छात्र राजकीय आईटीआई की फीस देंगे। वहीं पॉलिटेक्निक छात्रों को प्राइवेट पॉलिटेक्निक जितनी फीस देनी होगी। साथ ही पीपीई मॉडल के तहत संस्थान चलाने वाली कंपनी ही शिक्षकों की भर्ती करेगी। बैठक में कई अधिकारी मौजूद रहे पर बयान देने से सभी बचते नजर आए।

 



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