vishal panwar July 20, 2021


नई दिल्ली: अंतरिक्ष पर अब सिर्फ देशों की स्पेस एजेंसी का अधिकार नहीं रह गया है. अब स्पेस में जाने के लिए आपको एस्ट्रोनॉट बनने की भी ज़रूरत नहीं है. अगर आप अरबपति हैं तो टूर के  लिए स्पेस में भी जा सकते हैं. आज स्पेस टूरिज्म के लिए बहुत बड़ा साबित होने जा रहा है. अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस तीन सैलानियों को लेकर अंतरिक्ष की सैर पर जाने वाले हैं.

ब्रैनसन के बाद बेजोस की बारी

सबसे बड़ी बात जेफ बेजोस को स्पेस टूर कराने में भारत की भूमिका है. दरअसल जिस स्पेस शटल ‘न्यू शेफर्ड’ से 4 टूरिस्ट स्पेस में जाएंगे, उसे बनाने वाली टीम में भारतीय संजल गवांडे भी शामिल हैं. यानी जेफ बेजोस को अंतरिक्ष भेजने में भारत की बेटी का भी योगदान है. इसी 11 जुलाई को अमेरिकी अरबपति रिचर्ड ब्रैनसेन ने भी अंतरिक्ष की यात्रा की थी, ब्रैनसन के बाद अब बेजोस की बारी है.

अंतरिक्ष को जीतने का जो सपना अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस ने साल 2000 में देखा था, वो साल 2021 में पूरा होने जा रहा है. स्पेस शटल अब जेफ बेजोस के इस सपने को पूरा करेगा. बेजोस 60 फुट लंबे स्पेस शटल से 20 जुलाई को धरती से अंतरिक्ष की सैर पर जाएंगे. अब से कुछ घंटों बाद बेजोस की कंपनी ब्लू ओरिजिन का स्पेस शटल ‘न्यू शेफर्ड’ अमेरिका के टेक्सस में बने लॉन्चिंग पैड से लॉन्च होने के लिए तैयार है. 

कैसा होगा ये मिशन?

जेफ बेजोस का न्यू शेफर्ड रॉकेट एक कैप्सूल के साथ अंतरिक्ष में उड़ेगा और धरती से करीब 80 किलोमीटर की ऊंचाई पर रॉकेट और कैप्सूल अलग-अलग हो जाएंगे. वहां से कैप्सूल धरती से 105 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष की ऑर्बिट में पहुंचेगा, जहां जीरो ग्रेविटी में ये कैप्सूल 4 मिनट तक रहेगा और उसके बाद कैप्सूल की धरती पर वापसी की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. धरती की ऑर्बिट में आने के बाद कैप्सूल में लगे पैराशूट खुल जाएंगे और कैप्सूल की लैंडिंग टेक्सस के रेगिस्तान में होगी. इस स्पेस टूअर में कुल 11 मिनट लगेंगे.

अपनी ही कंपनी के स्पेसशटल में विंडो वाली सीट जेफ बेजोस ने अपने पास रखी है, उनके साथ तीन और सैलानी आसमान के पार जाने वाले हैं.  जेफ बेजोस के साथ अंतरिक्ष में जाने वाला अगला नाम है वैली फंक का है जिनकी उम्र 82 साल है. वैली फंक सबसे कम उम्र में पायलट का लाइसेंस हासिल करने वाली अमेरिकी महिला हैं.

वैली फंक 1960 में अंतरिक्ष में जाने वाली थीं, लेकिन कुछ कारणों से वो अंतरिक्ष यात्रा पर नहीं जा पाईं. अब 6 दशक बाद वैली फंक का अधूरा सपना आज पूरा होने जा रहा है. इसके अलावा 18 साल के ऑलिवर डेमेन भी इस सफर का हिस्सा होंगे. ऑलिवर की किस्मत ने उन्हें अंतरिक्ष जाने का मौका दिया है क्योंकि कुछ दिन पहले तक अंतरिक्ष का ये टिकट ब्लू ओरिजिन ने किसी और को दिया था. 

28 मिलियन डॉलर यानी क़रीब 205 करोड़ रुपये की बोली लगाकर एक अनजान शख्स ने ब्लू ओरिजिन से अंतरिक्ष जाने का टिकट बुक किया था, लेकिन दो दिन पहले ही उस शख्स ने अपनी टिकट कैंसल कर दी, जिसके बाद ऑलिवर डेमेन की लॉटरी लग गई. जेफ बेजोस अंतरिक्ष की सैर पर जाने के साथ-साथ कई रिकॉर्ड भी बनाने जा रहे हैं.    

स्पेस में भारत की पहचान

बेजोस ने अपने स्पेस टूअर के लिए 20 जुलाई की तारीख को चुना है, उसके पीछे भी एक खास वजह है. दरअसल 20 जुलाई 1969 को पहली बार चांद पर अंतरिक्ष यात्रियों वाला स्पेसशिप उतरा था और इसीलिए बेजोस ने 20 जुलाई का दिन चुना. जेफ बेजोस अंतरिक्ष की यात्रा पर जाएंगे तो अपने साथ भारत की पहचान भी ले जाएंगे.

दरअसल बेजोस के न्यू शेफर्ड रॉकेट का डिजाइन जिस टीम ने तैयार किया है उस टीम में स्पेस साइंटिस्ट संजल गवांडे भी शामिल हैं. संजल महाराष्ट्र के कल्याण ज़िले की रहने वाली हैं. मुंबई यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियर संजल 2011 से अमेरिका में हैं. संजल ने अमेरिका के मिशिगन यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की है. 

इससे पहले 9 जुलाई को अरबपति रिचर्ड ब्रैनसन ने भी अंतरिक्ष की यात्रा की थी. उन्होंने अपनी कंपनी वर्जिन गेलेक्टिक की फ्लाइट से 90 मिनट में अंतरिक्ष को छू लिया था. ब्रैनसन के साथ भारतीय मूल की सिरिशा बांदला भी स्पेस टूरिस्ट के रूप में गई थीं. 

कितना अलग बेजोस का मिशन?

ब्रैनसन से बेजोस तक, अंतरिक्ष यात्रा में भारत का योगदान किसी न किसी रूप में ज़रूर है. नासा के वैज्ञानिकों में भी 36 फीसदी भारतीय ही हैं. यानी भारतीयों के बगैर अंतरिक्ष जाने की कल्पना अब कोई भी नहीं कर सकता. जेफ बेजोस का स्पेस क्राफ्ट आज अमेरिका से उड़ेगा लेकिन 11 जुलाई को अरबपति रिचर्ड ब्रेनसन ने बेजोस से बाज़ी मार ली और अंतरिक्ष की यात्रा कर ली. बेजोस और ब्रैनसन के अंतरिक्ष पहुंचने का तरीका कितना अलग-अलग है. 

वर्जिन गैलेक्टिक के मालिक रिचर्ड ब्रैनसन VSS यूनिटी प्लेन से अंतरिक्ष में पहुंचे थे उनकी उड़ान में उनके साथ एक पायलट समेत 6 लोग सवार थे. वहीं अरबपति जेफ बेजोस न्यू शेफर्ड स्पेस शटल से उड़ान भरेंगे और अंतरिक्ष की कक्षा में पहुंचने से पहले कैप्सूल अलग हो जाएगा 

रिचर्ड ब्रैनसन ने वर्जिन गैलेक्टिक की शुरुआत साल 2004 में की थी, जबकि जेफ बेजोस ने ब्लू ओरिजिन कंपनी साल 2000 में शुरू की थी. दोनों का मकसद स्पेस टूरिज्म था. ब्रैनसन की VSS यूनिटी धरती से 85 किमी. ऊंचाई तक गई, वहां पर 4 मिनट तक यात्रियों को जीरो ग्रैविटी महसूस हुई. जबकि जोसेफ का ब्लू शेफर्ड धरती से 105 किमी. की ऊंचाई तक जाएगा और उन्हें भी 4 मिनट तक जीरो ग्रैविटी में रहने का मौका मिलेगा.

मस्क भी शुरू करेंगे टूर

ब्रैनसन अपने साथ 5 लोगों को स्पेस में ले गए थे, जबकि बेजोस अपने साथ 3 लोगों को ले जा रहे हैं. ब्रैनसन को अंतरिक्ष तक पहुंचने और वापस लौटने में 90 मिनट लगे जबकि बेजोस को इस काम में सिर्फ 10 मिनट लगेंगे. वर्जिन गैलेक्टिक ने फाइनल उड़ान से पहले 3 बार फ्लाइट का ट्रायल किया था, ब्लू ओरिजिन 15 बार स्पेस शटल लॉन्चिंग का ट्रायल कर चुकी है. 

रिचर्ड ब्रैनसन साल 2022 से हर साल 400 फ्लाइट स्पेस में भेजेंगे. मतलब हर फ्लाइट में 5 से 6 टूरिस्ट होंगे और माना जा रहा है कि एक-एक टूरिस्ट को स्पेस जाने के लिए पौने दो करोड़ रुपये चुकाने होंगे. ब्रैनसन और बेजोस के बाद अगला नंबर एलन मस्क का भी आएगा. मस्क ने भी SPACE X नाम से स्पेस कंपनी बनाई है. उनकी कंपनी तो पहले से अंतरिक्ष में सैटेलाइट और अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने का काम करती है. 

अमेरिकी सरकार ने SPACE X के जरिए पिछले साल अंतरिक्ष यात्रियों को इंटरनेशनल स्पेस सेंटर भेजा था. अब मस्क भी टूरिस्टों को अंतरिक्ष घुमाने के प्लान पर काम कर रहे हैं. उनकी कंपनी भी अगले साल तक कॉमर्शियल स्पेस टूरिज्म का कारोबार शुरू कर देगी.

इसरो भी कर रहा तैयारी

एक तरफ जहां अमेरिका के अरबपतियों में अंतरिक्ष जाने की होड़ मची है, तो वहीं भारत भी मानव को अंतरिक्ष में भेजने वाली योजना पर तेज़ी से काम कर रहा है. भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ISRO ने पिछले दिनों मिशन गगनयान को लेकर बड़ी उपलब्धि हासिल की. इसरो ने लिक्विड प्रोपलेंट विकास इंजन का लंबी अवधि वाला हॉट टेस्ट किया.

इसरो ने तीसरी बार सफलतापूर्वक ये ट्रायल किया. इस पर SPACE X कंपनी के सीईओ एलन मस्क ने ट्वीट कर इसरो को बधाई भी दी. इसरो का मानव रहित गगनयान मिशन इस साल दिसंबर के अंत तक लॉन्च होने की संभावना है. कोरोना की वजह से इस मिशन में एक साल की देरी हुई है.





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