vishal panwar August 22, 2020


ड्रग्स के काराेबार में पकड़े गए आरोपी
– फोटो : amar ujala

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कानपुर के ड्रग्स माफिया सुशील शर्मा उर्फ बच्चा ने वर्ष 1990 में अपराध की दुनिया में कदम रखा। छोटी-मोटी चोरियों, लूटपाट और मारपीट से शुरूआत की। इसके बाद शहर के एक माफिया पप्पू डॉन के संपर्क में आकर वह बढ़ता चला गया। वर्ष 2004 में ऋषिकांत शुक्ला ने पप्पू डॉन को एनकाउंटर में मार गिराया।

इसके बाद बच्चा पुलिस का मुखबिर बनकर पप्पू गैंग समेत कई अन्य अपराधियों के शातिर गुर्गों को पकड़वाने लगा। जब कई अपराधी पीछे पड़ गए तो उसने काकादेव थाना क्षेत्र के विजय नगर में एक सुअर बाड़ा खोल दिया। पुलिस की शह पर इस सुअर बाड़े की आड़ में जुआ खिलवाने लगा। साथ ही चरस, गांजे व ड्रग्स का धंधा भी शुरू कर दिया। धीरे-धीरे पुलिस की मिलीभगत से पूरे शहर में ड्रग्स का कारोबार फैलाया।

 
फिर आसपास के जिलों से राजधानी लखनऊ तक नेटवर्क बना लिया। पश्चिम बंगाल, उड़ीसा व नेपाल से थोक मादक पदार्थ लाकर बेचने लगा। इसके बदले में वह धंधे के सहयोगी पुलिस कर्मियों को 50 हजार से लेकर दो लाख रुपये तक महीना सुविधा शुल्क पहुुंचाता था। ऐसे मेें बच्चा जब-जब किसी अपराध में गिरफ्तार हुआ, पुलिसवाले ही उसकी ढाल बने। उस पर ऐसी धाराएं लगतीं, जिससे जमानत मिलने में खास दिक्कत नहीं होती थी। 

सिंधी कालोनी में भट्ठा मालिक के घर डाली थी डकैती   
बच्चा ने साथियों संग मिलकर सिंधी कालोनी निवासी एक भट्ठा मालिक के घर दिन दहाड़े डकैती डाली थी। सूत्रों के अनुसार इसमें रकम के बंटवारे को लेकर विवाद हो गया था जिसके बाद डकैती का खुलासा हुआ था। इस डकैती में शामिल कुछ लोग अब सफेदपोश बन गए हैं। दिन दहाड़े हुई डकैती के बाद सिंधी कालोनी के सभी प्रवेश द्वारों पर गेट लगवाए गए थे।

 
पुलिस पकड़ती थी, पुलिस ही बचाती थी 
बच्चा जब-जब गिरफ्तार हुआ, पुलिस धाराआें में खेल कर उसे बचा लेती थी। चरस, गांजा, स्मैक बरामद होने के बाद पुलिस इसे कम दिखाकर धाराओं में हेरफेर कर उसे जेल भेज देती। जिसके एवज में वह बच्चा से अच्छी खासी रकम लेती थी। धाराएं कमजोर होने से वह आसानी से छूटता रहा और गोरखधंधे में दिन दूना, रात चौगुनी तरक्की करता रहा। 

पत्नी बनती रही बच्चा की ढाल
विजय नगर में सुअरबाड़ा खोलने के बाद बच्चा ने शादी की। पुलिस जब सुअरबाड़े की आड़ में उसके जुआ, चरस व गांजे के कारोबार पर छापा मारने पहुंचती, पत्नी सामने आ जाती। जब तक पुलिस उससे पूछताछ करती बच्चा नशे का सामान लेकर भाग निकलता। मोहल्ले के लोगों से भी बच्चा का अच्छा बर्ताव रहता था जिससे उसकी मदद करने वालों की अच्छी सख्या हो गई थी। उसने इलाके में अपने कई मुखबिर छोड़ रखे थे। 

चलती गाड़ी में खिलवाता था जुआ
सूत्रों के मुताबिक बच्चा ड्रग्स के धंधे से पहले जुए का सबसे बड़ा फड़ चलवाता था। घर पर लगातार पुलिस का छापा पड़ने से वह चलती गाड़ी में जुआ खेलवाने लगा। धीरे-धीरे उसने तीन गाड़ियां जुटा लीं। लेकिन उसके विरोधियों ने पुलिस से साठगांठ कर गाड़ियां पकड़वा दीं। 

कानपुर के ड्रग्स माफिया सुशील शर्मा उर्फ बच्चा ने वर्ष 1990 में अपराध की दुनिया में कदम रखा। छोटी-मोटी चोरियों, लूटपाट और मारपीट से शुरूआत की। इसके बाद शहर के एक माफिया पप्पू डॉन के संपर्क में आकर वह बढ़ता चला गया। वर्ष 2004 में ऋषिकांत शुक्ला ने पप्पू डॉन को एनकाउंटर में मार गिराया।

इसके बाद बच्चा पुलिस का मुखबिर बनकर पप्पू गैंग समेत कई अन्य अपराधियों के शातिर गुर्गों को पकड़वाने लगा। जब कई अपराधी पीछे पड़ गए तो उसने काकादेव थाना क्षेत्र के विजय नगर में एक सुअर बाड़ा खोल दिया। पुलिस की शह पर इस सुअर बाड़े की आड़ में जुआ खिलवाने लगा। साथ ही चरस, गांजे व ड्रग्स का धंधा भी शुरू कर दिया। धीरे-धीरे पुलिस की मिलीभगत से पूरे शहर में ड्रग्स का कारोबार फैलाया।

 



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