vishal panwar August 22, 2020


पटना: जैसे जैसे बिहार विधानसभा (Bihar Vidhansabha election) की आहट बढ़ती जा रही है वैसे वैसे बिहार की राजनीतिक गलियारों में हलचल भी बढ़ गई है और अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या बिहार विधानसभा चुनाव से पहले RJD बिखर जाएगी? क्योंकि लगातार आरजेडी के कई नेता पार्टी का साथ छोड़ रहे हैं. 

वहीं, आरजेडी के कई नेताओं का दावा है कि आने वाले समय JDU के कई दिग्गज नेता RJD में शामिल होंगे, लेकिन बिहार के इन दो प्रमुख पार्टी के नेता ही एक दूसरे को छोड़कर एक दूसरे में जा रहे हैं तो वहीं बीजेपी और कांग्रेस के नेता अभी तक अपने पार्टी में विश्वास के साथ बने हुए हैं.

आरजेडी में मची भगदड़ पर एमएलसी सुबोध राय ने कहा कि सारे के सारे नेता आरजेडी से निकाले जा चुके थे. वह जेडीयू के लिए काम कर रहे थे. जो भी नेता गए हैं वह पार्टी के लिए कुछ भी नहीं थे. स्वार्थ में जेडीयू को ज्वाइन कर रहे हैं.

ऐसा नहीं है कि जनता और जेडीयू से उनका कोई लेना देना है. आज यदि जेडीयू टिकट नहीं देगी तो वहां भी वो छोड़ भागेंगे. चुनाव है आना जाना लगा रहता है. सारे के सारे नेता स्वार्थ में पार्टी छोड़ते हैं और ज्वाइन करते हैं.

बीजेपी नेता निखिल आनंद ने कहा कि आरजेडी पार्टी में ना तो कोई संगठन है ना कोई आइडियोलॉजी. वह एक परिवार की पार्टी है. ऑफिस की पार्टी है. ऐसे में तेजस्वी यादव के नेतृत्व में लोग हताश निराश हैं. तेजस्वी यादव पर भरोसा नहीं रहा है. इसीलिए लोग वहां से भाग रहे हैं. नेतृत्व को करीबी समझने वाले भाग रहे हैं. समय के अंतराल में आरजेडी ध्वस्त हो जाएगी.

आरजेडी में भगदड़ पर जेडीयू नेता ने कहा कि आरजेडी ने सत्ता के लिए जो ‘एम-वाई’ की सोशल इंजीनियरिंग की थी, वह अब टूट गयी है. आरजेडी ने सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल अपने परिवार को आगे बढ़ाने के लिए किया है. आज हालत यह है कि पार्टी के नाम पर सिर्फ उनका परिवार ही बचा है. माय ने आरजेडी परिवार को बाय-बाय कह दिया है.

आरएलएसपी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव माधव आनंद ने कहा कि आरजेडी से वैसे लोग ही जा रहे हैं, जिनकी नीति नहीं है, जिनकी आस्था नहीं है. आरजेडी एक सिद्दांत वाली पार्टी है. बिहार की जनता एक विकल्प के रूप में महागठबंधन को देखती है. य़ुवाओं का बोलबाला रहेगा.





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