vishal panwar August 23, 2020


घटना के बाद मौके पर मौजूद पुलिस
– फोटो : amar ujala

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उत्तर प्रदेश में हमीरपुर की राठ सीएचसी में डॉक्टरों की लापरवाही से उपचार के अभाव में एक किसान की जान नहीं बचाई जा सकी है। कर्ज में डूबे किसान ने जहरीला पदार्थ निगल लिया था। जिसे लेकर परिजन अस्पताल पहुंचे। जहां डेढ़ घंटे तक उपचार न मिलने पर उसकी मौत हो गई।

राठ कोतवाली के बिगवां गांव निवासी कुँवरलाल (52) पुत्र छोटेलाल अहिरवार ने रविवार सुबह खेत पर पहुंच जहरीला पदार्थ खा लिया। पड़ोसियों से सूचना मिलने पर परिजनों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राठ में भर्ती कराया। बड़े भाई जयपाल ने बताया कि अस्पताल में कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं था।

एक कर्मचारी द्वारा उसे बोतल चढ़ा कर आगे उपचार से हाथ खड़े कर दिए गए। परिजनों द्वारा पूछने पर हर बार डॉक्टर के आने की बात कहकर तसल्ली दी गई। बताया कि स्टाफ द्वारा बाहर से दवा भी मंगा ली गई पर उपचार नहीं किया गया। करीब डेढ़ घंटे बाद जब किसान ने तड़पते हुए दम तोड़ दिया तब स्टाफ कर्मचारी ने परिजनों को रेफर लेटर बना कर थमा दिया।

 
जिसके बाद भड़के लोगों का आक्रोश देख कर्मचारी भी मौके से भाग गया। बेटा किसान के परिजनों द्वारा हंगामा करने की सूचना पर तीन घंटे बाद अस्पताल पहुंचे सीएससी अधीक्षक डा आरके कटियार ने डाक्टरों के न होने की बात कहते हुए उन्हें डपट दिया।

अधीक्षक ने बताया कि अस्पताल के 4 डॉक्टरों की ड्यूटी कोविड 19 अस्पताल में लगाई गई है जिस वजह से उपचार किया डॉक्टर ही मौजूद नहीं है। मृतक किसान के भाई जयपाल ने बताया की म्रतक के नाम पर चार बीघा कृषि भूमि है। जिस पर खेती कर परिवार का भरण पोषण करता था।

2 साल पहले पुत्री साधना वह 1 साल पहले पुत्र रामनाथ की शादी में करीब ढाई लाख रुपए का कर्ज हो गया था। वहीं कृषि कार्य के लिए किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से 90 हजार रुपये का कर्ज ले रखा था। कर्ज चुकता न होने पर उसने जहरी पदार्थ खाया था।

उत्तर प्रदेश में हमीरपुर की राठ सीएचसी में डॉक्टरों की लापरवाही से उपचार के अभाव में एक किसान की जान नहीं बचाई जा सकी है। कर्ज में डूबे किसान ने जहरीला पदार्थ निगल लिया था। जिसे लेकर परिजन अस्पताल पहुंचे। जहां डेढ़ घंटे तक उपचार न मिलने पर उसकी मौत हो गई।

राठ कोतवाली के बिगवां गांव निवासी कुँवरलाल (52) पुत्र छोटेलाल अहिरवार ने रविवार सुबह खेत पर पहुंच जहरीला पदार्थ खा लिया। पड़ोसियों से सूचना मिलने पर परिजनों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राठ में भर्ती कराया। बड़े भाई जयपाल ने बताया कि अस्पताल में कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं था।

एक कर्मचारी द्वारा उसे बोतल चढ़ा कर आगे उपचार से हाथ खड़े कर दिए गए। परिजनों द्वारा पूछने पर हर बार डॉक्टर के आने की बात कहकर तसल्ली दी गई। बताया कि स्टाफ द्वारा बाहर से दवा भी मंगा ली गई पर उपचार नहीं किया गया। करीब डेढ़ घंटे बाद जब किसान ने तड़पते हुए दम तोड़ दिया तब स्टाफ कर्मचारी ने परिजनों को रेफर लेटर बना कर थमा दिया।

 



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