vishal panwar August 23, 2020


भोपाल: फेथ ग्रुप और राघवेंद्र सिंह तोमर ये दो नाम कई दिनों से सुर्खियों में हैं. इनके जरिए बिल्डर और अफसरों की सांठगांठ के कई राज़ खुले हैं. मध्य प्रदेश में चल रहे काले कारोबार में कई किरदार और सफेदपोश हैं जिन्होंने इस गोरखधंधे में शामिल होकर करोड़ों की कमाई की है. इनमें एक चेहरा वो भी है जो कुछ बरसों में ही करोड़ों की कमाई कर सवालों में घिर गया है. ये वो शख्स है जिसके पिता आज भी चूड़ियां बेचते हैं, लेकिन ये शख्स अब बेहिसाब दौलत का मालिक है. सूत्रों के मुताबिक इसने 2013 में 5 लाख रुपए से एक कंपनी शुरू की थी. इस शख्स का नाम पीयूष गुप्ता है. जिसने महज 7 बरसों में ही करोड़ों की दौलत बना ली. पीयूष गुप्ता जांच एजेंसियों के रडार पर है. 

 गुरुवार को छापेमारी में मिली थी 750 करोड़ की संपत्ति
गुरुवार की सुबह आयकर विभाग ने फेथ ग्रुप के साथ ही कई कंपनियों पर दबिश दी थी. जिसमें पीयूष गुप्ता की एए एंड एए एण्ड कंपनी भी शामिल थी. सूत्रों के मुताबिक 3 दिन की छानबीन के बाद आयकर विभाग के हाथ करीब एक हज़ार करोड़ की प्रॉपर्टी के कागज़ात हाथ लगे हैं. इसमें 750 करोड़ की संपत्ति बेनामी है. हालांकि आयकर विभाग ने अब तक 105 करोड़ की 100 प्रापर्टी मिलने की ही पुष्टि की है. आयकर विभाग ने अपनी जांच को पीयूष गुप्ता पर फोकस कर दिया है.

फेथ ग्रुप और राघवेंद्र सिंह तोमर ये दो नाम कई दिनों से सुर्खियों में हैं.

5 लाख से छोटी कंपनी में लगता था IPS अधिकारी का पैसा
पीयूष गुप्ता ने 2013 में रेहान खान के साथ मिलकर गोल्डन ग्रुप रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाई थी. 5 लाख रुपए की कंपनी की आड़ में पीयूष गुप्ता ने करोड़ों की काली कमाई खपाई. पीयूष ने कई बड़े अधिकारियों का का भरोसा जीता, और उनकी काली कमाई को अपने प्रोजेक्ट में लगाया. पीयूष के प्रोजेक्ट में एक रिटायर IPS ने नौकरी में रहते हुए करोड़ों रुपए लगाए. बढ़ते नेटवर्क और प्रॉपर्टी को देखते हुए पीयूष ने अपने परिवार के लोगों के नाम पर पैसा लगाना शुरू किया. 

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कर्मचारियों को बनाता गारंटर
पीयूष गुप्ता अपने कर्मचारियों के नाम से प्रॉपर्टी लेता था. वो अपने कर्मचारियों को गारंटर भी बनाता था. पीयूष के घर से जांच में मिले दस्तावेजों में एक कर्मचारी उमेश पिरयानी का नाम भी सामने आया है. जानकारी मिलने के बाद ज़ी MPCG की टीम बैरसिया इलाके की न्यू सिंधि कॉलोनी में पिरयानी के घर पहुंची. उमेश पिरयानी ने बताया कि उसने, पीयूष गुप्ता के यहां 9 महीने नौकरी की थी, उसे पीयूष पर भरोसा था, इसलिए उसने जब कभी किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने को कहा, उसने दस्तखत कर दिए, कभी गारंटर के रूप में तो कभी ज्वॉइंट वेंचर कंपनी के कागजों पर दस्तखत किए. उमेश पिरयानी ने बताया कि उसे नहीं पता कि उसके नाम पर पीयूष ने कोई निवेश किया है कि नहीं. 

पीयूष के नाम मिली है अकूत संपत्ति
ख़बर है कि आयकर विभाग की टीम को पीयूष की पत्नी, मां-बाप समेत कई रिश्तेदारों के नाम पर 18 फर्जी कंपनियां मिली हैं. पीयूष ने 357 एकड़ जमीन, 22 रेसीडेंसियल प्लाट, 7 फ्लेट, 6 मकान, 4 डुप्लेक्स, 2 रिसोर्ट, 8 रेसीडेंसियल प्रोजेक्ट, 2 शापिंग मॉल, 4 दुकान और 2 होटल में काली कमाई खपाई है. पीयूष गुप्ता ने इसके लिए दूसरी रियल स्टेट कंपनियों के नाम से भी निवेश किया था. मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने इस पूरे केस को 7 नवंबर 2019 को आयकर विभाग को सौंपते हुए फेथ बिल्डर्स को ऑब्जर्वेशन में लेने को कहा था.

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नकम टैक्स टीम के हाथ इंटरनल एग्रीमेंट लगे हैं
इसके बाद आयकर विभाग लगातार फेथ बिल्डर्स के चेयरमैन राघवेन्द्र तोमर, उनके पार्टनर्स, ब्यूरोक्रेटस और कुछ राजनेताओं पर नजर रखे हुए था. आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ की गई शिकायत के आधार पर की गई पड़ताल में पुख्ता तथ्य मिलने के बाद आयकर विभाग की टीम ने 20 अगस्त की सुबह 5 बजे फेथ बिल्डर के ठिकानों पर छापा मारा था. सूत्रों का कहना है कि इनकम टैक्स टीम के हाथ इंटरनल एग्रीमेंट भी लगे हैं, जिसमें नेता और अफसरों की काली कमाई का बेनामी निवेश करने का जिक्र है. हालांकि मामला हाई प्रोफाईल होने की वजह से आयकर विभाग गोपनीयता बरत रहा है.

आयकर विभाग ने इनको लिया जांच के दायरे में
फेथ बिल्डर चेयरमेन राघवेन्द्र सिंह तोमर और उनके पार्टनर पीयूष गुप्ता के अलावा फारुख नसीमुद्दीन, महेन्द्र गोधा, विपिन जैन, प्रकाशचंद परियानी, पूनम गुप्ता, समरीन खान, राजकुमार जौहरी को आयकर विभाग ने अपनी जांच के दायरे में लिया है. इनमें एनपीआर एंड एसोसिएट, श्री पीएसबी इंटरप्राइजेज, गोल्डन ग्रुप रियल स्टेट प्राइवेट लिमिटेड के जीएन कॉलोनाइजर, गोल्डन इंटरप्राइजेज, गोल्डन इंसपिरिया, एए एंड एए एंड कंपनी, श्री राधे एंड कंपनी, फोनिक्स रिएल्टी,  ब्लैक रोज एंड कंपनी, व्हाइट रोज एंड कंपनी, राज रियल स्टेट आदि कंपनियां शामिल हैं.

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