vishal panwar August 22, 2020


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औद्योगिक थाना क्षेत्र पुलिस ने शनिवार को कैबिनेट मंत्री नंदी पर हमले के आरोपी दिलीप मिश्रा के निरस्त हो चुके लाइसेंस से संबंधित दो असलहे जब्त कर लिए। दोनों असलहे कॉटन मिल तिराहा स्थित पांडेय गन हाउस में रखे गए थे, जहां पहुंचकर पुलिस ने इन्हें अपने कब्जे में ले लिया।

पूर्व चाका ब्लाक ब्लाक प्रमुख दिलीप मिश्रा को करीब एक महीने पहले आरएसएस पदाधिकारी समेत दो लोगों की हत्या की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, जहां से कुछ दिनों बाद उसे फतेहगढ़ जेल स्थानांतरित कर दिया गया था। 20 जुलाई को डीएम ने दिलीप के 2 शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर दिए थे, जिसके बाद जब्तीकरण के लिए पुलिस ने कॉटन मिल तिराहा पर स्थित पांडेय गन हाउस में छापा मारा था।

बता दें कि यह गन हाउस पहले से सील चल रहा है। यहां पहुंचने के बाद पुलिस को एक डीबीबीएल बंदूक व एक राइफल मिली थी। लेकिन, काफी दिनों से निष्प्रयोज्य पड़ी होने के कारण इस पर अंकित शस्त्र संख्या आदि अपठनीय हो गई थी। आर्मोरर ने अपने रिकॉर्ड से मिलान कर यह रिपोर्ट दी कि दोनों असलहे दिलीप मिश्रा के नाम से जारी लाइसेंस पर लिए गए थे। इसके बाद शनिवार को इंस्पेक्टर औद्योगिक क्षेत्र चंद्रभान सिंह ने मय फोर्स गन हाउस पहुंच कर दोनों असलहे जब्त कर लिए।

मुट्ठीगंज के पते से लिए गए थे लाइसेंस

इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि लवायन कला निवासी दिलीप मिश्रा ने दोनों शस्त्र लाइसेंस मुट्ठीगंज के पते पर जारी कराया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जानकारी जुटाने पर यह भी पता चला की मुट्ठी गंज स्थित किसी मकान में खुद को किराएदार बताकर दिलीप ने उपरोक्त दोनों लाइसेंस अपने नाम से जारी कराए थे। इस मामले में बाद में उसके खिलाफ मुट्ठीगंज थाने में मुकदमा भी पंजीकृत किया गया था। ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद भी शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने में इतनी देरी क्यों हुई। क्या पुलिस ने इस संबंध में जिला प्रशासन को कोई रिपोर्ट नहीं दी?

औद्योगिक थाना क्षेत्र पुलिस ने शनिवार को कैबिनेट मंत्री नंदी पर हमले के आरोपी दिलीप मिश्रा के निरस्त हो चुके लाइसेंस से संबंधित दो असलहे जब्त कर लिए। दोनों असलहे कॉटन मिल तिराहा स्थित पांडेय गन हाउस में रखे गए थे, जहां पहुंचकर पुलिस ने इन्हें अपने कब्जे में ले लिया।

पूर्व चाका ब्लाक ब्लाक प्रमुख दिलीप मिश्रा को करीब एक महीने पहले आरएसएस पदाधिकारी समेत दो लोगों की हत्या की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, जहां से कुछ दिनों बाद उसे फतेहगढ़ जेल स्थानांतरित कर दिया गया था। 20 जुलाई को डीएम ने दिलीप के 2 शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर दिए थे, जिसके बाद जब्तीकरण के लिए पुलिस ने कॉटन मिल तिराहा पर स्थित पांडेय गन हाउस में छापा मारा था।

बता दें कि यह गन हाउस पहले से सील चल रहा है। यहां पहुंचने के बाद पुलिस को एक डीबीबीएल बंदूक व एक राइफल मिली थी। लेकिन, काफी दिनों से निष्प्रयोज्य पड़ी होने के कारण इस पर अंकित शस्त्र संख्या आदि अपठनीय हो गई थी। आर्मोरर ने अपने रिकॉर्ड से मिलान कर यह रिपोर्ट दी कि दोनों असलहे दिलीप मिश्रा के नाम से जारी लाइसेंस पर लिए गए थे। इसके बाद शनिवार को इंस्पेक्टर औद्योगिक क्षेत्र चंद्रभान सिंह ने मय फोर्स गन हाउस पहुंच कर दोनों असलहे जब्त कर लिए।

मुट्ठीगंज के पते से लिए गए थे लाइसेंस

इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि लवायन कला निवासी दिलीप मिश्रा ने दोनों शस्त्र लाइसेंस मुट्ठीगंज के पते पर जारी कराया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जानकारी जुटाने पर यह भी पता चला की मुट्ठी गंज स्थित किसी मकान में खुद को किराएदार बताकर दिलीप ने उपरोक्त दोनों लाइसेंस अपने नाम से जारी कराए थे। इस मामले में बाद में उसके खिलाफ मुट्ठीगंज थाने में मुकदमा भी पंजीकृत किया गया था। ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद भी शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने में इतनी देरी क्यों हुई। क्या पुलिस ने इस संबंध में जिला प्रशासन को कोई रिपोर्ट नहीं दी?



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