vishal panwar August 22, 2020


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कोरोना के कारण चंद्रशेखर आजाद पार्क के रखरखाव पर संकट खड़ा हो गया है। आनलॉक में पार्क तो कुछ घंटों के लिए खोला जा रहा है, लेकिन कमाई 93 प्रतिशत तक घट गई है। सिर्फ सात फीसदी टिकट की बिक्री हो रही है। ऐसे में पार्क के जॉगिंग ट्रैक की मरम्मत समेत कई काम नहीं हो पा रहे हैं। इतना ही नहीं खर्च को कम करने के लिए उद्यान विभाग को कई सख्त कदम भी उठाने पड़े हैं।  

आजाद पार्क में नर्सरी आदि के लिए सरकार से बजट स्वीकृत है, लेकिन पार्क के रखरखाव, सुरक्षा आदि की व्यवस्था के लिए बजट का इंतजाम उद्यान प्रशासन को पार्क की इनकम से करना होता है। इसके लिए पार्क में पांच रुपये प्रवेश शुल्क लगाया गया। अफसरों के अनुसार टिकट की बिक्री से वर्ष में करीब सवा करोड़ रुपये की आमदनी हो जाती थी, लेकिन संक्रमण की वजह से कई महीने पार्क बंद रहा।

आनलॉक में पार्क सुबह-शाम के लिए खोला गया है, लेकिन गिनती के ही लोग आते हैं। अधीक्षक डॉ.सीमा राणा ने बताया कि रोजाना दो से ढाई हजार रुपये के टिकट की ही बिक्री हो पा रही है। ऐसे में एक महीने की आमदनी लगभग 70 से 75 हजार रुपये है। यदि यही हालात रहे तो एक वर्ष में टिकट से करीब नौ लाख रुपये की ही आमदनी हो पाएगी, जबकि पार्क के रखरखाव पर एक करोड़ रुपये सालाना खर्च होते हैं।

अमृत योजना से भी नहीं हो पाई मरम्मत

आजाद पार्क का जॉगिंग ट्रैक कई जगह से उखड़ गया है। ऐसे में पीडीए की अमृत योजना से उसके मरम्मत की कवायद शुरू की गई, लेकिन वहां भी आर्थिक संकट की बात कही जा रही है। टॉयलेट निर्माण का काम भी अधूरा है।

कर्मचारियों की संख्या में भी कटौती होगी 

रकम की कमी से आजाद पार्क में कर्मचारियों की संख्या में कटौती की कवायद भी शुरू हो गई है। कई तो बाहर भी हो गए हैं। टिकट वितरण के लिए एजेंसी हायर की गई थी, लेकिन अब उससे करार खत्म हो गया है। बजट नहीं होने की वजह से दोबारा करार नहीं हुआ और काउंटर पर उद्यान के कर्मचारी ही बैठ रहे हैं। इसके अलावा पार्क की सुरक्षा में सबसे अधिक प्रति वर्ष 70 लाख रुपये खर्च होते हैं। वहां कुल 22 गार्ड तैनात हैं। खर्च में कटौती के लिए सुरक्षा बजट और गार्ड की संख्या कम करने की तैयारी है। इस पर सोमवार तक निर्णय होने की उम्मीद है।

कोरोना के कारण चंद्रशेखर आजाद पार्क के रखरखाव पर संकट खड़ा हो गया है। आनलॉक में पार्क तो कुछ घंटों के लिए खोला जा रहा है, लेकिन कमाई 93 प्रतिशत तक घट गई है। सिर्फ सात फीसदी टिकट की बिक्री हो रही है। ऐसे में पार्क के जॉगिंग ट्रैक की मरम्मत समेत कई काम नहीं हो पा रहे हैं। इतना ही नहीं खर्च को कम करने के लिए उद्यान विभाग को कई सख्त कदम भी उठाने पड़े हैं।  

आजाद पार्क में नर्सरी आदि के लिए सरकार से बजट स्वीकृत है, लेकिन पार्क के रखरखाव, सुरक्षा आदि की व्यवस्था के लिए बजट का इंतजाम उद्यान प्रशासन को पार्क की इनकम से करना होता है। इसके लिए पार्क में पांच रुपये प्रवेश शुल्क लगाया गया। अफसरों के अनुसार टिकट की बिक्री से वर्ष में करीब सवा करोड़ रुपये की आमदनी हो जाती थी, लेकिन संक्रमण की वजह से कई महीने पार्क बंद रहा।

आनलॉक में पार्क सुबह-शाम के लिए खोला गया है, लेकिन गिनती के ही लोग आते हैं। अधीक्षक डॉ.सीमा राणा ने बताया कि रोजाना दो से ढाई हजार रुपये के टिकट की ही बिक्री हो पा रही है। ऐसे में एक महीने की आमदनी लगभग 70 से 75 हजार रुपये है। यदि यही हालात रहे तो एक वर्ष में टिकट से करीब नौ लाख रुपये की ही आमदनी हो पाएगी, जबकि पार्क के रखरखाव पर एक करोड़ रुपये सालाना खर्च होते हैं।

अमृत योजना से भी नहीं हो पाई मरम्मत

आजाद पार्क का जॉगिंग ट्रैक कई जगह से उखड़ गया है। ऐसे में पीडीए की अमृत योजना से उसके मरम्मत की कवायद शुरू की गई, लेकिन वहां भी आर्थिक संकट की बात कही जा रही है। टॉयलेट निर्माण का काम भी अधूरा है।

कर्मचारियों की संख्या में भी कटौती होगी 

रकम की कमी से आजाद पार्क में कर्मचारियों की संख्या में कटौती की कवायद भी शुरू हो गई है। कई तो बाहर भी हो गए हैं। टिकट वितरण के लिए एजेंसी हायर की गई थी, लेकिन अब उससे करार खत्म हो गया है। बजट नहीं होने की वजह से दोबारा करार नहीं हुआ और काउंटर पर उद्यान के कर्मचारी ही बैठ रहे हैं। इसके अलावा पार्क की सुरक्षा में सबसे अधिक प्रति वर्ष 70 लाख रुपये खर्च होते हैं। वहां कुल 22 गार्ड तैनात हैं। खर्च में कटौती के लिए सुरक्षा बजट और गार्ड की संख्या कम करने की तैयारी है। इस पर सोमवार तक निर्णय होने की उम्मीद है।



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