vishal panwar August 23, 2020


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
Updated Sun, 23 Aug 2020 12:32 PM IST

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मातृभाषा के प्रति प्रेम के कारण कई युवाओं ने अपना जीवन इसके प्रचार-प्रचार में लगा दिया। फिरोजाबाद जिले में कई युवा ऐसे हैं, जिन्होंने विज्ञान, इतिहास जैसे विषयों में डिग्री हासिल की। हालांकि अपने शौक के कारण हिंदी भाषा के प्रति आकर्षिक हुए। मातृभाषा के प्रति प्रेम के कारण इन युवाओं ने कई सम्मान भी प्राप्त किए और अब इसी के होकर रह गए। ये युवा कविताएं, कहानियां, लेख आदि लिखकर आज की पीढ़ी को राजभाषा हिंदी के प्रति लुभा रहे हैं। 

विज्ञान वर्ग से की पढ़ाई की, युवाओं को प्रेरित करने को लिखीं हिंदी में कविताएं 
एका निवासी गौरांगी मिश्रा ने करियर बनाने के लिए विज्ञान वर्ग से पढ़ाई की लेकिन हिंदी को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण योगदान भी दिया। उन्होंने बताया कि उन्हें शुरू से ही कविता लिखने का शौक था। कई कवि सम्मेलन में भाग लिया और वाहवाही लूटी। वर्तमान में वह काव्य की किताबें लिख रही हैं, जो भगवान राम को समर्पित हैं। वह बताती हैं कि भौतिक विज्ञान से एमएससी किया है लेकिन हिंदी को बढ़ावा देने के लिए काव्य में रुचि लेने लगीं। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भाषा का प्रयोग करें और बच्चों को मातृभाषा के लिए प्रेरित करें तो स्वत: ही हिंदी को बढ़ावा मिलने लगेगा। 

हिंदी के सम्मान में प्रवीन से बने प्रज्ञार्थ
गांव इटौरा निवासी प्रवीन कुमार पांडेय प्रज्ञार्थ हिंदी के सम्मान के लिए प्रवीन से प्रज्ञार्थु बन गए। भले ही प्रवीन ने इतिहास विषय में नेट परीक्षा उत्तीर्ण की लेकिन हिंदी को बढ़ावा देने के लिए वह पूरी तरह प्रयासरत हैं। देश में हिंदी युवा गीतगार के रूप में उनकी पहचान हैं। कोरोना काल में वो मुक्तक संग्रह भी लिख चुके हैं। वर्तमान में वो प्रज्ञा हिंदी सेवार्थ ट्रस्ट की वार्षिक पत्रिका ‘कनक काव्य कुसुम’ का संपादन कार्य देख रहे हैं। उन्हें दिल्ली की संस्था हंस वाहिनी बिल्स साहित्य मंच से सम्मानित किया जा चुका है। वह कहते हैं कि हिंदी सम्मान में वह आगे भी कार्य करते रहेंगे। 

हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए हासिल की काव्य शास्त्र की डिग्री
गांव लखउआ निवासी सुनील सुकुमार ने काव्य शास्त्र में शास्त्री की डिग्री हासिल की है। उन्होंने हिंदी कविता के प्रचार-प्रसार के लिए ही अपनी डिग्री दी। इनके द्वारा कोरोना काल में दो पुस्तक लिखी गई हैं। वो कहते हैं कि भले ही कोई अन्य विषय में डिग्री हासिल कर ले लेकिन सम्मान हिंदी विषय के ज्ञाता को ही मिलता है। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए सरकार को भी आगे आना चाहिए। ऐसा नियम बनाना चाहिए कि सरकारी अभिलेख सभी हिंदी में ही हों। दुकानों पर भी बिल हिंदी में हो तो निश्चित तौर पर हिंदी को बढ़ावा मिलेगा। 

अंजली ने हिंदी विषय में पाए सर्वाधिक अंक, मिला सम्मान
करियर बनाने में लोग विज्ञान, अंग्रेजी विषय को तवज्जो देते हैं लेकिन दाऊदयाल महाविद्यालय की छात्रा अंजली ने एमए में हिंदी विषय में सर्वाधिक अंक हासिल किए। अंजली को शब्दम संस्था और प्रज्ञा हिंदी सेवार्थ संस्थान ने अलग-अलग समारोह में सम्मानित किया था। अंजली कहती हैं कि हिंदी हमारी मातृभाषा है। उसके सम्मान के लिए युवाओं को आगे आना चाहिए।

सार

  • हिंदी विषय में करियर बना रहे युवक, पा रहे सम्मान

विस्तार

मातृभाषा के प्रति प्रेम के कारण कई युवाओं ने अपना जीवन इसके प्रचार-प्रचार में लगा दिया। फिरोजाबाद जिले में कई युवा ऐसे हैं, जिन्होंने विज्ञान, इतिहास जैसे विषयों में डिग्री हासिल की। हालांकि अपने शौक के कारण हिंदी भाषा के प्रति आकर्षिक हुए। मातृभाषा के प्रति प्रेम के कारण इन युवाओं ने कई सम्मान भी प्राप्त किए और अब इसी के होकर रह गए। ये युवा कविताएं, कहानियां, लेख आदि लिखकर आज की पीढ़ी को राजभाषा हिंदी के प्रति लुभा रहे हैं। 

विज्ञान वर्ग से की पढ़ाई की, युवाओं को प्रेरित करने को लिखीं हिंदी में कविताएं 

एका निवासी गौरांगी मिश्रा ने करियर बनाने के लिए विज्ञान वर्ग से पढ़ाई की लेकिन हिंदी को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण योगदान भी दिया। उन्होंने बताया कि उन्हें शुरू से ही कविता लिखने का शौक था। कई कवि सम्मेलन में भाग लिया और वाहवाही लूटी। वर्तमान में वह काव्य की किताबें लिख रही हैं, जो भगवान राम को समर्पित हैं। वह बताती हैं कि भौतिक विज्ञान से एमएससी किया है लेकिन हिंदी को बढ़ावा देने के लिए काव्य में रुचि लेने लगीं। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भाषा का प्रयोग करें और बच्चों को मातृभाषा के लिए प्रेरित करें तो स्वत: ही हिंदी को बढ़ावा मिलने लगेगा। 



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