vishal panwar August 23, 2020


आगरा: नोट बंदी हो या फिर लॉकडाउन (Lockdown) इन दोनों में गरीबों ने ही मार सहन की है. नोट बंदी में तो किसी तरह से गरीब परिवारों ने भूखे प्यासे रहकर दिन गुजार लिए लेकिन कोरोना वायरस (Coronavirus) महामारी जैसी खतरनाक बीमारी के कारण देश में लगे लॉकडाउन ने आधे से ज्यादा गरीबों की कमर तोड़कर रख दी.

ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश में आगरा के ताजगंज के गांव बरौली अहीर में देखने को मिला है. जब एक गरीब परिवार की पांच वर्षीय बच्ची ने बीमारी के कारण दम तोड़ दिया. इससे पहले नोट बंदी के दौरान इसी परिवार ने अपना इकलौता दीप भी बुझते हुए देखा था. इस पूरे मामले को जिलाधिकारी ने संज्ञान में लेकर तहसीलदार के नेतृत्व में टीम को भेजकर जांच करवाई.

ताजगंज के गांव बरौली अहीर ब्लॉक के नगला विधिचंद निवासी शीला देवी का आरोप है कि नोट बंदी और लॉकडाउन ने मेरे बेटे और बेटी की जान ले ली. गरीबी उनके परिवार के लिए अभिशाप बनी हुई है. लॉकडाउन में पति की नौकरी चले जाने के बाद से घर में भुखमरी जैसे हालात पैदा हो गए. पिछले एक सप्ताह से घर में खाने को कुछ भी नहीं था. बेटी भी बीमार चल रही थी. उसने भी कई दिनों से कुछ नहीं खाया था. बिजली विभाग ने भी घर की बिजली काटकर 7 हजार रुपये का बिल थमा दिया था, जो भरने की उनकी छमता नहीं थी. भूख, प्यास और बिजली न होने के कारण गरीब परिवार की बच्ची की रविवार को मौत हो गई.

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बच्ची की मौत की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी प्रभु एन. सिंह ने पूरे मामले को संज्ञान में लेते हुए तहसीलदार सदर प्रेमपाल को टीम के साथ जांच करने के लिए शीला देवी के घर भेज दिया. टीम ने जांच करके शीला देवी के घर पर 50 किलो आटा, 40 किलो चावल और अन्य राशन सामग्री उपलब्ध करवाई.

तहसीलदार ने जिलाधिकारी को जांच रिपोर्ट में बताया कि बच्ची की मौत बीमारी के कारण हुई है. उसके शरीर मे खून की कमी हो गई थी. वहीं पिता ने बताया कि बेटी ने दम तोड़ने से पहले दूध पिया था.

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