vishal panwar August 22, 2020


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली
Updated Sun, 23 Aug 2020 01:49 AM IST

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मेरठ में एनसीईआरटी की करोड़ों रुपये की नकली किताबों के पकड़े जाने के बाद शामली जनपद में भी हलचल मची रही। जनपद में भी अधिकतर स्कूल-कॉलेजों में फिक्स दुकानों पर सेलेबस मिलता है। इसे लेकर जिले में भी नकली किताबों की बिक्री की आशंका बन रही है। हालांकि अभी तक इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं है।

मेरठ में शुक्रवार को एनसीईआरटी की करोड़ों रुपये की नकली किताबों का भंडाफोड़ हुआ है। नकली किताबों को लेकर जनपद में भी चर्चा बनी रही। लोगों में जिले में भी नकली किताबों के बिकने की आशंका बनी रही।

जिले में यूपी बोर्ड से संबंधित किताबें मेरठ से सप्लाई होती है। ऐसे में एनसीईआरटी की नकली किताबें मेरठ से सप्लाई होने की आशंका बन रही है। इसके अलावा अधिकतर स्कूल-कालेजों का सेलेबस बिक्री के लिए दुकानें फिक्स होती हैं। अभिभावकों को फिक्स दुकानों से ही किताबें लेनी पड़ती है। इस वजह से भी नकली किताबों को खपाने की संभावना बन रही है। हालांकि जांच के बाद ही असलियत का पता चल सकेगा।

फिलहाल इतना तो तय है कि मेरठ नजदीक होने के कारण वहां से किताबों की सप्लाई बड़े स्तर पर जिले में होती है। हालांकि बुक सेलर व स्कूल संचालक एनसीईआरटी की किताबों की सप्लाई दिल्ली से होना बता रहे हैं। बुक सेलर अनिल कुमार ने बताया कि एनसीईआरटी की सभी किताबें दिल्ली से सप्लाई होती है। वहीं से किताबें मंगाई जाती है। स्कॉटिश इंटरनेशनल स्कूल के प्रशासनिक अधिकारी प्रदीप त्यागी ने बताया कि एनसीईआरटी की किताबें दिल्ली से आती है।

असली-नकली किताबों में अंतर
असली किताबों में हर पेज पर वाटर मार्क से एनसीईआरटी लिखा होता है। जबकि नकली किताबों में ऐसा कुछ नहीं होता। असली किताबों के पेज चिकने और चमकदार होते है जबकि नकली किताबों में कागज हल्का और सादा लगा होता है।

डिमांड पूरी न होने का उठाते हैं फायदा
एनसीईआरटी की किताबों की सप्लाई और मांग में बड़ा अंतर होता है। जरूरत से कम सप्लाई होने का फायदा उठाकर इस धंधे से जुड़े लोग नकली किताबें सप्लाई कर देते हैं। अभिभावक और छात्र इस बात से अनजान रहते हैं और वे सिर्फ किताबें खरीदने तक ही सीमित रह जाते हैं।

किताब विक्रेताओं के यहां पहले भी कई बार किताबों की जांच की जा चुकी है। जिले में यूपी बोर्ड या एनसीईआरटी की किताबों का प्रकाशन नहीं होता। मेरठ में नकली किताबें मिलने का मामला जानकारी में आया है। इसे लेकर दुकानों पर किताबों की जांच की जाएगी। – सरदार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक।

मेरठ में एनसीईआरटी की करोड़ों रुपये की नकली किताबों के पकड़े जाने के बाद शामली जनपद में भी हलचल मची रही। जनपद में भी अधिकतर स्कूल-कॉलेजों में फिक्स दुकानों पर सेलेबस मिलता है। इसे लेकर जिले में भी नकली किताबों की बिक्री की आशंका बन रही है। हालांकि अभी तक इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं है।

मेरठ में शुक्रवार को एनसीईआरटी की करोड़ों रुपये की नकली किताबों का भंडाफोड़ हुआ है। नकली किताबों को लेकर जनपद में भी चर्चा बनी रही। लोगों में जिले में भी नकली किताबों के बिकने की आशंका बनी रही।

जिले में यूपी बोर्ड से संबंधित किताबें मेरठ से सप्लाई होती है। ऐसे में एनसीईआरटी की नकली किताबें मेरठ से सप्लाई होने की आशंका बन रही है। इसके अलावा अधिकतर स्कूल-कालेजों का सेलेबस बिक्री के लिए दुकानें फिक्स होती हैं। अभिभावकों को फिक्स दुकानों से ही किताबें लेनी पड़ती है। इस वजह से भी नकली किताबों को खपाने की संभावना बन रही है। हालांकि जांच के बाद ही असलियत का पता चल सकेगा।



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