vishal panwar August 22, 2020


इलाहाबाद हाईकोर्ट
– फोटो : अमर उजाला

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संपत्ति क्षति दावा अधिकरण विधेयक विधानसभा में पारित होने की सूचना से इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता जनप्रतिनिधियों से खफा हो गए हैं। अधिवक्ता अधिकरण की पीठें लखनऊ और मेरठ के बजाए प्रयागराज में चाहते हैं। इसके लिए विरोध भी शुरू किया गया था, मगर वकीलों का विरोध परवान चढ़ता, इससे पूर्व ही विधानसभा से विधेयक पास होने की सूचना से उनमें मायूसी छा गई। 

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के महासचिव प्रभाशंकर मिश्र का कहना है कि मौजूदा कोरोना काल को देखते हुए आंदोलन की क्या रणनीति होगी, इस पर विचार करने के लिए सोमवार को बैठक बुलाई गई है। महासचिव ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रति भी नाराजगी जताई है।

उनका कहना है कि डिप्टी सीएम से लेकर कद्दावर मंत्री तक प्रयागराज का प्रतिनिधित्व करते हैं, मगर किसी ने भी विधेयक को पास होने से रोकने की कोशिश नहीं की। उनका कहना है कि यह भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है। जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वह जनता की आकांक्षाओं और सम्मान के लिए प्रयास करेंगे, मगर दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। 

उल्लेखनीय है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील लगातार यह दावा करते आ रहे हैं कि किसी भी अधिकरण की स्थापना वहीं हो सकती है, जहां उस राज्य के हाईकोर्ट की प्रधानपीठ स्थित हो। ऐसा न करना असांविधानिक होगा और सुप्रीमकोर्ट के आदेश का उल्लंघन भी है। गत दिनों शिक्षा सेवा अधिकरण की स्थापना लखनऊ में करने का यहां के वकीलों ने पुरजोर विरोध किया था परिणाम स्वरूप सरकार को अपना निर्णय बदलना पड़ा था। अब दावा अधिकरण को प्रयागराज लाने के लिए वकील आंदोलन करने की तैयारी कर रहे हैं।

संपत्ति क्षति दावा अधिकरण विधेयक विधानसभा में पारित होने की सूचना से इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता जनप्रतिनिधियों से खफा हो गए हैं। अधिवक्ता अधिकरण की पीठें लखनऊ और मेरठ के बजाए प्रयागराज में चाहते हैं। इसके लिए विरोध भी शुरू किया गया था, मगर वकीलों का विरोध परवान चढ़ता, इससे पूर्व ही विधानसभा से विधेयक पास होने की सूचना से उनमें मायूसी छा गई। 

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के महासचिव प्रभाशंकर मिश्र का कहना है कि मौजूदा कोरोना काल को देखते हुए आंदोलन की क्या रणनीति होगी, इस पर विचार करने के लिए सोमवार को बैठक बुलाई गई है। महासचिव ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रति भी नाराजगी जताई है।

उनका कहना है कि डिप्टी सीएम से लेकर कद्दावर मंत्री तक प्रयागराज का प्रतिनिधित्व करते हैं, मगर किसी ने भी विधेयक को पास होने से रोकने की कोशिश नहीं की। उनका कहना है कि यह भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है। जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वह जनता की आकांक्षाओं और सम्मान के लिए प्रयास करेंगे, मगर दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। 

उल्लेखनीय है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील लगातार यह दावा करते आ रहे हैं कि किसी भी अधिकरण की स्थापना वहीं हो सकती है, जहां उस राज्य के हाईकोर्ट की प्रधानपीठ स्थित हो। ऐसा न करना असांविधानिक होगा और सुप्रीमकोर्ट के आदेश का उल्लंघन भी है। गत दिनों शिक्षा सेवा अधिकरण की स्थापना लखनऊ में करने का यहां के वकीलों ने पुरजोर विरोध किया था परिणाम स्वरूप सरकार को अपना निर्णय बदलना पड़ा था। अब दावा अधिकरण को प्रयागराज लाने के लिए वकील आंदोलन करने की तैयारी कर रहे हैं।



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