vishal panwar August 22, 2020


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
Updated Sun, 23 Aug 2020 01:59 AM IST

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कुछ कर गुजरने की इच्छा हो तो मुश्किल रास्ता नहीं रोक सकती। उत्तर प्रदेश के बागपत जनपद के बालैनी थानाक्षेत्र के युवा विकास कुमार ने भी यही कर दिखाया है। बोनसाई पेड़ों की घर में ही नर्सरी तैयार कर विकास कुमार ने आय का स्रोत भी बनाया और क्षेत्र के लोगों के लिए भी नई राह खोल दी है।

मतातनगर गांव निवासी विकाश कुमार ने बताया कि स्नातक शिक्षा हासिल करने के बाद वह कुछ अलग करना चाहता था। उसे पड़े पौधों से बेहद प्यार था। तय किया गया कि अपने शौक को कमाई का जरिया बनाया जाएगा। यू ट्यूब और सोशल मीडिया के जरिये उसने बोनसाई पौध तैयार करना सीखा।
 

करीब दो साल तक वह इस पर काम करता रहा। धीरे-धीरे नतीजे आने शुरू हो गए। विकास का कहना है कि क्षेत्र के अलावा आसपास के जिलों के लोग भी अब उसके पास बोनसाई के पेड़ लेने के लिए आते हैं। वह कहता है कि अब पौधों को बेचकर प्रति माह करीब 30 से 40 हजार रुपये तक की वह कमाई कर लेता है।

नर्सरी में हजारों पेड़
विकास के पास 19 साल पुराना पोंडा का पेड़ और 10 साल पुराना जेड प्लांट गमले में लगा है। अन्य पौधे भी वह तैयार कर रहा है। एरिका, साइकस, सेसोबिरिया, पाम, फोनिफरा, पेनिटेल के अलावा लगभग एक सौ वैरायटी के करीब दो हजार पेड़ गमलों में लगे हैं।

विश्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने की चाहत
बोनसाई पेड़ लगाने के मामले में पुणे की युवती का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हैं। विकास का कहना है कि वह भी रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराना चाहता है।

सार

  • बोनसाई नर्सरी से मिला रोजगार, अब विश्व रिकॉर्ड की चाहत 
  • मतातनगर के युवा ने घर में ही बोनसाई की नर्सरी लगाकर की शुरूआत

विस्तार

कुछ कर गुजरने की इच्छा हो तो मुश्किल रास्ता नहीं रोक सकती। उत्तर प्रदेश के बागपत जनपद के बालैनी थानाक्षेत्र के युवा विकास कुमार ने भी यही कर दिखाया है। बोनसाई पेड़ों की घर में ही नर्सरी तैयार कर विकास कुमार ने आय का स्रोत भी बनाया और क्षेत्र के लोगों के लिए भी नई राह खोल दी है।

मतातनगर गांव निवासी विकाश कुमार ने बताया कि स्नातक शिक्षा हासिल करने के बाद वह कुछ अलग करना चाहता था। उसे पड़े पौधों से बेहद प्यार था। तय किया गया कि अपने शौक को कमाई का जरिया बनाया जाएगा। यू ट्यूब और सोशल मीडिया के जरिये उसने बोनसाई पौध तैयार करना सीखा।

 



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