vishal panwar August 22, 2020


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एनसीईआरटी : एसजीएसटी का दल भी जांच में कूदा, पता लगाएगा कहां से आया किताबों का कागज
मेरठ। एनसीईआरटी की फर्जी किताबें छापने के मामले में स्टेट जीएसटी की टीम भी पड़ताल कर रही है। हालांकि किताबों पर कोई जीएसटी नहीं लगता है। लेकिन किताबें छापने के लिए जो कागज इस्तेमाल किया गया है अगर वह किसी बिना रजिस्टर्ड फर्म से खरीदा गया है तो फिर 12 प्रतिशत जीएसटी लगेगा।
राज्य वस्तु एवं सेवा कर (स्टेट जीएसटी) के ज्वाइंट कमिश्नर ओपी वर्मा और राजेश राय की टीम भी इस मामले की पड़ताल में जुटी हैं। एसजीएसटी (एसआईबी) के एडिशनल कमिश्नर शशि भूषण सिंह ने बताया कि स्टेट जीएसटी की टीम ने भी दिन भर पड़ताल की है। जहां किताबें छप रही थीं, वहां टीम ने जाकर जांच की। वह फर्म जीएसटी में पंजीकृत है। टीम के हिसाब से करीब 11 करोड़ की किताबें मिली हैं। टीम को अभी तक कोई ऐसा व्यक्ति नहीं मिला है जिससे पता चल सके कि यह कागज कहां से आ रहा था। लेकिन इतना माना जा रहा है कि अगर यहां एनसीईआरटी की किताबें छापने की अनुमति ही नहीं है तो फिर यह कागज किसी पंजीकृत फर्म से खरीदा गया हो ऐसा नहीं लगता है। हालांकि पूरी पड़ताल के बाद ही पता चल पाएगा कि यह कागज कहां से आया था और इस पर जीएसटी बनता है या नहीं।

एनसीईआरटी : एसजीएसटी का दल भी जांच में कूदा, पता लगाएगा कहां से आया किताबों का कागज

मेरठ। एनसीईआरटी की फर्जी किताबें छापने के मामले में स्टेट जीएसटी की टीम भी पड़ताल कर रही है। हालांकि किताबों पर कोई जीएसटी नहीं लगता है। लेकिन किताबें छापने के लिए जो कागज इस्तेमाल किया गया है अगर वह किसी बिना रजिस्टर्ड फर्म से खरीदा गया है तो फिर 12 प्रतिशत जीएसटी लगेगा।

राज्य वस्तु एवं सेवा कर (स्टेट जीएसटी) के ज्वाइंट कमिश्नर ओपी वर्मा और राजेश राय की टीम भी इस मामले की पड़ताल में जुटी हैं। एसजीएसटी (एसआईबी) के एडिशनल कमिश्नर शशि भूषण सिंह ने बताया कि स्टेट जीएसटी की टीम ने भी दिन भर पड़ताल की है। जहां किताबें छप रही थीं, वहां टीम ने जाकर जांच की। वह फर्म जीएसटी में पंजीकृत है। टीम के हिसाब से करीब 11 करोड़ की किताबें मिली हैं। टीम को अभी तक कोई ऐसा व्यक्ति नहीं मिला है जिससे पता चल सके कि यह कागज कहां से आ रहा था। लेकिन इतना माना जा रहा है कि अगर यहां एनसीईआरटी की किताबें छापने की अनुमति ही नहीं है तो फिर यह कागज किसी पंजीकृत फर्म से खरीदा गया हो ऐसा नहीं लगता है। हालांकि पूरी पड़ताल के बाद ही पता चल पाएगा कि यह कागज कहां से आया था और इस पर जीएसटी बनता है या नहीं।



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