vishal panwar August 24, 2020


हस्तिनापुर स्थित जंबूद्वीप में पूजा-अर्चना करते जैन संत।

हस्तिनापुर स्थित जंबूद्वीप में पूजा-अर्चना करते जैन संत।
– फोटो : MAWANA

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हस्तिनापुर(मेरठ)। जम्बूद्वीप स्थित चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर प्रवचन हॉल में दशलक्षण महापर्व के अवसर पर गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता ससंघ के पावन सान्निध्य में इंद्र ध्वज महामंडल विधान का शुभारंभ हुआ। जिसमें मुख्य इंद्र विजय कुमार जैन, रश्मि जैन बने।
रविवार को पर्युषण पर्व के पहले दिन भगवान का मस्तकाभिषेक किया। जिसमें श्रीजी की प्रतिमा पर दूध, दही, घी, जल, सर्वोषधि, चंदन, पुष्प वर्षा की गई। पूज्य गणिनी ज्ञानमती माता ने कहा कि यह इंद्र ध्वज विधान पूरे विश्व के लिए मंगलकारी हो एवं करने वाले प्रत्यक्ष रूप में इसका फल प्राप्त करते हैं। जिसमें तेरहद्वीप के 458 जिनालयों का पूजन किया जाता है। कहा कि दशलक्षण पर्व में आज प्रथम दिन उत्तम क्षमा का दिन है। क्षमा आत्मा का लक्षण हैै। शास्त्रों में कहा गया है कि क्षमा को वीर व्यक्ति ही धारण कर सकता है। प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार जैन ने कहा कि कोरोना महामारी के चलते कमेटी के पांच जोड़े ही इंद्र के रूप में बैठे हैं। कहा कि दस दिन तक चलने वाले पूजन का विशेष महत्व है। मध्यान्ह में प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती माता द्वारा तत्वार्थ सूत्र की दस अध्याय का वर्णन होगा। संघस्थ ब्रह्मचारिणी बहनों द्वारा सरस्वती आराधना की जायेगी। संस्थान के अध्यक्ष पीठाधीश स्वस्ति रवींद्र कीर्ति स्वामी द्वारा शांति मंत्र का उच्चारण किया गया।

हस्तिनापुर(मेरठ)। जम्बूद्वीप स्थित चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर प्रवचन हॉल में दशलक्षण महापर्व के अवसर पर गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता ससंघ के पावन सान्निध्य में इंद्र ध्वज महामंडल विधान का शुभारंभ हुआ। जिसमें मुख्य इंद्र विजय कुमार जैन, रश्मि जैन बने।

रविवार को पर्युषण पर्व के पहले दिन भगवान का मस्तकाभिषेक किया। जिसमें श्रीजी की प्रतिमा पर दूध, दही, घी, जल, सर्वोषधि, चंदन, पुष्प वर्षा की गई। पूज्य गणिनी ज्ञानमती माता ने कहा कि यह इंद्र ध्वज विधान पूरे विश्व के लिए मंगलकारी हो एवं करने वाले प्रत्यक्ष रूप में इसका फल प्राप्त करते हैं। जिसमें तेरहद्वीप के 458 जिनालयों का पूजन किया जाता है। कहा कि दशलक्षण पर्व में आज प्रथम दिन उत्तम क्षमा का दिन है। क्षमा आत्मा का लक्षण हैै। शास्त्रों में कहा गया है कि क्षमा को वीर व्यक्ति ही धारण कर सकता है। प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार जैन ने कहा कि कोरोना महामारी के चलते कमेटी के पांच जोड़े ही इंद्र के रूप में बैठे हैं। कहा कि दस दिन तक चलने वाले पूजन का विशेष महत्व है। मध्यान्ह में प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती माता द्वारा तत्वार्थ सूत्र की दस अध्याय का वर्णन होगा। संघस्थ ब्रह्मचारिणी बहनों द्वारा सरस्वती आराधना की जायेगी। संस्थान के अध्यक्ष पीठाधीश स्वस्ति रवींद्र कीर्ति स्वामी द्वारा शांति मंत्र का उच्चारण किया गया।



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